जामिया मस्जिद में खिताब करते मीरवाइज उमर फारूक। संवाद
- फोटो : mathura
श्रीनगर। ऐतिहासिक जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद शुक्रवार को तकरीर करते हुए मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी उमर फारूक ने नई दिल्ली हुए बम धमाके में 13 लोगों की मौत पर दुखद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं इंसान को हिला कर रख देती हैं।
साथ ही कहा कि तथ्यों की तसदीक होने से पहले ही ऐसे हादसों का फायदा उठाया जाता है। इससे खास नरेटिव को हवा मिलती है कि फौरन इसे किसी खास मजहब या कौम से जोड़ दिया जाए और उन्हें मुजरिम ठहरा दिया जाए। नतीजा यह होता है कि भारत के विभिन्न शहरों और राज्यों में पढ़ने-लिखने व नौकरी करने वाले हमारे बच्चे और नौजवान रातोंरात शक के दायरे में आ जाते हैं। वे अपनी सुरक्षा को लेकर डरने लगते हैं, जबकि यहां के लोगों में बेचैनी पैदा होती है।
मीरवाइज ने कहा कि हमने हर तरह की हिंसा और आतंक का हमेशा विरोध किया है। मेरी तहे-दिल से गुजारिश है कि हुक्मरानों और फैसला करने वालों से कि वो जम्मू-कश्मीर के लोगों को सिर्फ सिक्योरिटी और लॉ एंड ऑर्डर के नजरिए से न देखें बल्कि दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिजारी वाजपेयी ने जो कहा था इंसानियत और जम्हूरियत के दायरे में रहकर उस रास्ते पर चलें। संवाद