बडगाम की चरार ए शरीफ दरगाह में मीरवाइज उमर फारूक। संवाद
- मीरवाइज-ए-कश्मीर ने एक दशक बाद चरार-ए-शरीफ में दिया प्रवचन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी मुहम्मद उमर फारूक ने शेख-उल-अलम हजरत शेख नूरुद्दीन नूरानी की प्रतिष्ठित दरगाह चरार-ए-शरीफ स्थित ऐतिहासिक खानकाह-ए-फैजपनाह में 10 साल बाद खुतबा पढ़ा। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि सूफी मूल्यों और न्याय आधारित शांति से फिर से जुड़ें।
मीरवाइज ने कहा कि महान सूफी संत शेख नूरुद्दीन नूरानी की पाक जमीन पर एक बार फिर आना एक अजीम किस्मत की बात है। उनकी दूरंदेशी और इल्म ने 500 सालों से भी अधिक समय से कश्मीरी लोगों के दिलों और दिमागों को आकार दिया है और पीढ़ियों को प्रेरित करता आ रहा है।
आज के दौर के बारे में मीरवाइज ने कहा कि जब इंसानियत भ्रम, विभाजन और संघर्ष से घिरी हुई है तो अपनी जड़ों और उन मूल मूल्यों से फिर से जुड़ना और भी जरूरी हो जाता है जिन्हें हमारे दरवेशों ने अपनाया था जैसे सादगी, समानता, करुणा और अहिंसा। उन्होंने युवाओं से इन परंपराओं से फिर से जुड़ने का आग्रह किया।