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Jammu News: हकीका और तनवीर चुने गए बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट

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श्रीनगर के टैगोर हॉल में जश्न ए तिफ्लान के समापन पर विजेताओं को प्रमाणपत्र देते आयोजक। अमर उजाल
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- टैगोर हॉल में जश्न-ए-तिफ्लान का रंगारंग समापन, मंच पर प्रस्तुत किए गए नाटक
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर कला मंच की ओर से श्रीनगर के टैगोर हॉल में जश्न-ए-तिफ्लान का आयोजन किया गया। 17 से 21 नवंबर तक चले इस महोत्सव के अंतिम दिन नाटकों की प्रस्तुति दी गई और अंत में बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट व अन्य अवार्ड दिए गए। श्रीनगर की हकीका को महिला और तनवीर को पुरुष वर्ग में बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट चुना गया।
पांच दिन चले जश्न-ए-तिफ्लान में बच्चों ने विभिन्न नाटक प्रस्तुत किए। इस दौरान टैगोर हॉल खचाखच भरा रहा। शुक्रवार को दोपहर से नाटकों का मंचन शुरू हुआ। देर शाम पुरस्कारों की घोषणा की गई। बेस्ट फीमेल चाइल्ड आर्टिस्ट का पुरस्कार न्यू कॅरिअर कॉन्वेंट स्कूल फतेहकदल की छात्रा हकीका को नाटक बछुस्न गुनहगार के लिए दिया गया।
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बेस्ट मेल चाइल्ड आर्टिस्ट का पुरस्कारन न्यू जीनियस पब्लिक स्कूल नवा बाजार के छात्र तनवीर को तहकीकात छु है जरूरी के लिए दिया गया। बेस्ट डायरेक्टर पुरस्कार नाटक रोवे केयाह ते प्रोवे केयाह के लिए शेख परवेज को दिया गया। इसी नाटक को बेस्ट प्ले भी घोषित किया गया। इसके अलावा तहकीकात छु जरूरी के लिए रुत्बा मुश्ताक व मुस्कान मंजूर को और साहिल के लिए सलमान रशीद को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए गए। वहीं विजेताओं को ट्रॉफी और प्रमाणपत्र मिले। कार्यक्रम के समापन पर सभी का धन्यवाद दिया गया। जश्न-ए-तिफ्लान के निर्देशक हकीम जावेद ने बताया कि बच्चों की प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए इस पांच दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जेएंडके एकेडमी ऑफ आर्ट कल्चर एंड लैंग्वेज और रेल्यूड फाउंडेशन ऑफ इंडिया की सहायता व हेल्प फाउंडेशन के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
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बच्चों को मोबाइल से दूर रखना अभिभावकों की जिम्मेदारी
समापन के दौरान अतिथि खुर्शीद अहमद ने कहा कि कश्मीर जहां थियेटर न के बराबर है वहां के बच्चों में भी इसकी अच्छी प्रतिभा है। हम उन्हें अवसर प्रदान नहीं कर पा रहे हैं। आज के नाटक में बच्चों ने बेहतरीन अभिनय किया, स्कूली बच्चों से इस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की जाती लेकिन कश्मीर कला मंच में उनमें जो हुनर भरा है वह काबिले तारीफ है। सिल्वर स्क्रीन (मोबाइल) से दूर कर बच्चों को रंगमंच पर लाना एक बड़ा काम है। इसमें अभिभावकों की भी बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों को कैसे इससे दूर रखते हैं।
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