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Jammu News: हाईकोर्ट ने खारिज की दुष्कर्म के आरोपी बीएसएफ अधिकारी की याचिका

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कहा- विभागीय जांच और आपराधिक मुकदमा एक साथ चल सकते हैं
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने शनिवार को बीएसएफ के एक सहायक कमांडेंट की याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में एक महिला एएसआई द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी गई थी। महिला एएसआई ने अधिकारी पर शादी का झूठा वादा कर उसके साथ यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया है।

न्यायमूर्ति संजय धर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले में मुख्य प्रश्न यह है कि क्या याचिकाकर्ता (अखंड प्रकाश शाही) के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और विभागीय कार्यवाही एक साथ चल सकती है। अदालत ने कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि महिला एएसआई की शिकायत पर आधारित आरोप-पत्र आपराधिक न्यायालय में विचाराधीन है। साथ ही, बीएसएफ नियमों के नियम 173 के तहत याचिकाकर्ता के खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्यवाही भी उसी शिकायत पर आधारित है जो महिला एएसआई ने पुलिस के समक्ष दर्ज कराई थी। उस समय शाही एसटीसी एयरपोर्ट, हुमहामा, श्रीनगर में सहायक कमांडेंट के पद पर तैनात थे।
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अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता महिला ने बीएसएफ अधिकारियों के समक्ष भी शाही के खिलाफ यही आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इस संबंध में, प्रतिवादियों (बीएसएफ अधिकारियों) ने महिला एएसआई द्वारा 15 जुलाई 2022 को की गई शिकायत की एक प्रति अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज की है। जब स्वयं बल की सदस्य महिला एएसआई ने यह शिकायत की तो प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने बीएसएफ नियमों के नियम 173 के प्रावधानों के तहत उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया।

तदनुसार, 28 दिसंबर 2023 को आदेश जारी किया गया। जांच दल का कार्य याचिकाकर्ता के खिलाफ महिला एएसआई द्वारा लगाए गए दुष्कर्म, धमकी और ब्लैकमेल के आरोपों की जांच करना है, जो बल के एक कनिष्ठ सदस्य के विरुद्ध कदाचार के समान है। अदालत ने कहा कि आपराधिक न्यायालय द्वारा तय किया गया आरोप शादी के झूठे वादे पर महिला एएसआई के साथ याचिकाकर्ता द्वारा बनाए गए यौन संबंध से संबंधित है।
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अदालत ने स्पष्ट किया यदि याचिकाकर्ता पर लगाए गए ये आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो यह दुष्कर्म का अपराध तो होगा ही साथ ही यह कदाचार भी माना जाएगा, क्योंकि जिस व्यक्ति के खिलाफ यह आरोप है वह स्वयं भी पुलिस बल की सदस्य है। अदालत ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता के कथित कृत्य के परिणामों में आपराधिकता के साथ-साथ कदाचार भी शामिल है। अतः याचिकाकर्ता का यह तर्क कि उसका कथित कृत्य एक निजी मामला है और उसका उसकी सेवा से कोई लेना-देना नहीं है, स्वीकार्य नहीं है।
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