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नशे के सौदागर समाज के लिए खतरा : हाईकोर्ट

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- 4 साल से जेल में बंद ड्रग तस्कर की जमानत याचिका की खारिज की
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संवाद न्यूज एजेंसी

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक नशा तस्कर के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि नशे के सौदागर युवाओं की जिंदगी पर घातक वार करते हैं और पूरे समाज के लिए गंभीर खतरा हैं।
27 वर्षीय शाहनवाज अहमद डार की जमानत अर्जी खारिज करते हुए जस्टिस वसीम सादिक नरगल की बेंच ने कहा कि ड्रग तस्करों की गतिविधियां न सिर्फ व्यक्तियों की जिंदगी बर्बाद करती हैं बल्कि जन स्वास्थ्य को कमजोर करती हैं व परिवारों को तोड़ती हैं। अपराधों को बढ़ावा देती हैं और पूरी बस्तियों को खतरे में डालती हैं।
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कोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के कठोर प्रावधानों के बिना ऐसे अपराधियों को जमानत देना खतरनाक है क्योंकि इससे वे फिर उसी नेटवर्क में लौटकर अपराध दोहरा सकते हैं। ऐसे अपराधियों को समाज में दोबारा घुसने देने की सामाजिक कीमत अनगिनत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक जेल में रहना जमानत का आधार हो सकता है लेकिन एनडीपीएस एक्ट के कमर्शियल क्वांटिटी वाले मामलों में यह अकेला आधार नहीं बन सकता। धारा 37 के दो अनिवार्य शर्तों अपराधी के दोषी न होने के उचित आधार और जमानत पर छूटने के बाद फिर अपराध न करने की संभावना का संतोषजनक प्रमाण होना जरूरी है।

शाहनवाज 2021 से जेल में है और उसने दलील दी थी कि वह न्यूनतम सजा का एक-तिहाई से ज्यादा काट चुका है इसलिए उसकी रिहाई न होने से जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि 13 में से 10 गवाहों की गवाही हो चुकी है। ट्रायल अंतिम चरण में है और एनडीपीएस की धारा 37 वैधानिक प्रक्रिया है जिसे अनुच्छेद-21 के तहत मान्यता प्राप्त है।
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कोर्ट ने अंत में कहा कि कानून बनाने वालों ने जानबूझकर कमर्शियल मात्रा वाले मामलों में जमानत के लिए कठोर शर्तें रखी हैं। इन्हें सामान्य देरी या स्वतंत्रता के नाम पर कमजोर नहीं किया जा सकता। इसलिए याचिका खारिज करते हुए शाहनवाज अहमद डार को जमानत देने से इन्कार कर दिया गया।
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