श्रीनगर। कश्मीर भर के किसानों ने इस साल धान की पैदावार में भारी नुकसान की सूचना दी है जिसमें लगभग 40-50 प्रतिशत की गिरावट आई है। वे इस संकट के लिए महत्वपूर्ण फसल उत्पादन के महीनों में लंबे समय तक सूखे, उसके बाद लगातार बारिश और कटाई से ठीक पहले बाढ़ जैसी स्थिति को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
कई जिलों के किसानों ने कहा कि इस साल मौसम के मिजाज ने उनकी आजीविका को तबाह कर दिया है। पुलवामा के एक किसान नसीम वानी ने कहा कि लगातार तीन महीनों जून, जुलाई और अगस्त में बारिश न के बराबर हुई। फसल ठीक से नहीं उगी और फिर जब हम कटाई की उम्मीद कर रहे थे भारी बारिश ने कई दिनों तक खेत जलमग्न कर दिए। धान की फसलें गिर गईं और सड़ने लगीं।
कई लोगों ने कहा कि सूखे के कारण पहले से ही कमजोर उनकी फसल लगातार जलभराव का सामना नहीं कर सकी। अनंतनाग के एक अन्य किसान साजिद अहमद ने कहा कि कटाई से पहले हमारे खेत लगभग एक हफ्ते तक जलमग्न रहे। जब तक पानी कम हुआ, फसल इतनी खराब हो चुकी थी कि उसकी भरपाई नहीं हो सकी। कई जगहों पर किसान घरेलू इस्तेमाल के लिए भी पर्याप्त धान नहीं इकट्ठा कर पाए।
स्थानीय लोगों के अनुसार सैकड़ों परिवार जो आजीविका के लिए सीधे धान की खेती पर निर्भर हैं। इस साल बिना किसी सुरक्षित आय के रह गए हैं। बडगाम के एक किसान अब्दुल राशिद ने कहा कि हमने अपनी लगभग 40 प्रतिशत फसल खो दी है। जो परिवार केवल धान पर निर्भर हैं वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों ने मुआवजा नीति पर भी नाराजगी जताई और कहा कि अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि केवल फसल बीमा योजना के तहत बीमित लोग ही राहत के पात्र होंगे।
शोपियां के एक किसान नेता बशीर अहमद ने मांग की कि हम सभी को नुकसान हुआ है, चाहे बीमित हो या नहीं। सरकार इस समय किसानों के एक बड़े वर्ग को अकेला नहीं छोड़ सकती। जिन लोगों को नुकसान हुआ है उन सभी को मुआवजा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने और घाटी भर के धान उत्पादकों के लिए एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह किसी एक गांव या एक जिले की बात नहीं है, यह संकट व्यापक है। अगर सरकार अभी कदम नहीं उठाती तो धान की खेती पर निर्भर हजारों परिवारों की कमर टूट जाएगी।
कृषि विशेषज्ञों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि असामान्य मौसम पैटर्न लंबे समय तक सूखे के बाद अत्यधिक वर्षा इस मौसम में धान की फसल के लिए हानिकारक रहा है। इस बीच किसानों ने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजे की घोषणा प्राथमिकता के आधार पर करने और समय पर सहायता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि हम महीनों इंतजार नहीं कर सकते। हमारा नुकसान हर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। सरकार को बहुत देर होने से पहले कार्रवाई करनी चाहिए।