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ओलंपिक सपनों के बीच जमीनी हकीकत : प्रदेश के खिलाड़ियों के पास न कोच, न संसाधन

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जम्मू। देश 2036 में ओलंपिक की मेजबानी की तैयारियों में जुटा है। विभिन्न राज्यों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ओलंपिक खेलों में बुनियादी खेल ढांचे, प्रशिक्षकों की कमी है। ओलंपिक में शामिल खेलों में इस तरह की असुविधा चिंताजनक है।
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जम्मू-कश्मीर में बॉक्सिंग खेल की स्थिति और ज्यादा खराब है। जम्मू स्थित एमए स्टेडियम की बॉक्सिंग रिंक जर्जर हालत में है। न तो मापदंडों के अनुसार उपकरण हैं और न ही नियमित रखरखाव होता है। खिलाड़ी खुद अपनी सुरक्षा के लिए दस्ताने और गार्ड खरीदने को मजबूर हैं। ऐसा ही कुछ हाल वेट लिफ्टिंग और कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों का भी है। प्रशिक्षकों का अभाव है। अनुभवी कोच की सेवानिवृत्ति के बाद नए कोच की नियुक्तियां नहीं की गईं। इससे युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा निखर नहीं पा रही। कुश्ती जम्मू-कश्मीर में लोकप्रिय खेलों में शामिल है। गांव-देहात से शहर तक कुश्ती खेली जाती है, लेकिन प्रशिक्षकों की कमी और अनदेखी से खिलाड़ी विश्व पटल पर नहीं आ पाते हैं। रेसलिंग, स्विमिंग हो या एथलेटिक्स अधिकांश खेलों में प्रशिक्षक और बुनियादी ढांचे की कमी है। जम्मू व श्रीनगर शहर को छोड़ दें तो अन्य जिलों में खेल प्रशिक्षकों की कमी है। प्रदेश सरकार ने जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों में 100 खेलो इंडिया केंद्र तो बनाए हैं, लेकिन अनुभवी प्रशिक्षकों और खेल संसाधनों की कमी से वह परिणाम हासिल नहीं हो पा रहा है जिस उद्देश्य से इन केंद्रों को खोला गया है। आलम यह है कि प्रशिक्षण शिविरों में अनियमितता है। अंतरराज्यीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसरों की कमी है।
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उत्कृष्ट खिलाड़ियों को नहीं मिली नौकरी
एक दशक से भी ज्यादा समय से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी तक नहीं मिली है। ऐसे में नए खिलाड़ियों का मनोबल भी गिर रहा है। अगर जम्मू-कश्मीर को 2036 ओलंपिक की दिशा में योगदान देना है, तो सबसे पहले यहां बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। नहीं तो राष्ट्रीय स्तर पर मेडल की उम्मीद करना मुश्किल होगा।
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सरकारी तंत्र में काम अपने तय समय में होता है। जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए हर बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को शामिल किया जाना है। हमारे पास ढांचे हैं बस उनका उचित उपयोग करना होगा। प्रशिक्षकों की कमी को पूरा करना होगा।
- बलजिंद्र सिंह, संभागीय खेल अधिकारी (सेवानिवृत्त), स्पोर्ट्स काउंसिल
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ओलंपिक से जुड़े कैंप में जम्मू-कश्मीर के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को जगह मिले, ताकि वे समझ सकें की ओलंपिक खेल के लिए किस तरह के कौशल की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर के उत्कृष्ट कोच इसमें शामिल हों, ताकि वे भी समझ सकें कि किस तरह से कोचिंग दी जा सकती है। जम्मू-कश्मीर में कई राज्यों से अच्छी सुविधा है। हमें इनका उचित उपयोग करना चाहिए।
- डॉ. विनोद बख्शी, निदेशक, शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग, क्लस्टर विवि जम्मू

नेशनल खेलों में प्रदेश की टीम को प्रतिनिधित्व मिले, इसके लिए जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन काम करती है। खेल ढांचे को मजबूत करने और प्रशिक्षकों की कमी को पूरा करने का काम स्पोर्ट्स काउंसिल का होता है। हम अपने खिलाड़ियों के साथ खड़े हैं, लेकिन स्पोर्ट्स काउंसिल का जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन के प्रति रवैया ठीक नहीं है।
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- दुष्यंत शर्मा, अध्यक्ष, जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन
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