बिश्नाह। पब्लिक बजरंगी अखाड़ा कमेटी बिश्नाह के चेयरमैन देवराज भुट्टो प्रधान सतीश शर्मा की अध्यक्षता में दंगल का आयोजन दशहरा ग्राउंड में किया गया। इसमें देश भर से आए नामी पहलवानों ने दावं दिखाते हुए लाखों रुपये के पुरस्कार जीते।
दंगल का पहला पहला मुकाबला जाने-माने पहलवान प्रितपाल सिंह फगवाड़ा और दिल्ली के मोनू पहलवान के बीच हुआ। जिन्होंने आधे घंटे के संघर्ष के बाद भी जब कोई परिणाम नहीं निकला, तो दंगल कमेटी ने दोनों को संयुक्त विजेता घोषित कर दिया। दो लाख की पुरस्कार राशि को दोनों में बांट दी गई। दूसरे मुकाबले के लिए रवि पहलवान पंजाब और कोहाली अखाड़ा के सुखपाल पहलवान के बीच हुआ, जिसमें कड़ा मुकाबला देखने को मिला और आखिर में रवि पहलवान ने विजय प्राप्त की। उन्होंने एक मोटरसाइकिल जीती। तीसरे मुकाबले में एक दुधारूभैंस रखी गई, जिस पर छोटा सदाम और दिल्ली के गुरमीत पहलवान के बीच मुकाबला हुआ। संघर्षपूर्ण मुकाबले में छोटा सदाम ने विजय प्राप्त की।
इसके अलावा दंगल में 70 के करीब मुख्य मुकाबले कराए गए। पहलवानों में रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन के अलावा नकद इनाम भी बांटे गए। दंगल का शुभारंभ पूर्व विधायक अश्विनी कुमार शर्मा, दंगल के चेयरमैन देवराज सहित आए अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया। यह दंगल बिश्नाह का ऐतिहासिक दंगल है, जिसमें इस बार पुरस्कारों में बढ़ोतरी करते हुए दो मोटरसाइकिल, चार रेफ्रिजरेटर, चार वॉशिंग मशीन व अलमारी के अलावा लाखो रुपये के नकद इनाम रखे गए। दंगल का लोगों को बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। क्योंकि यह क्षेत्र का ऐतिहासिक और पुराना दंगल है। जहां देशभर के पहलवान शामिल होने के लिए उत्सुक रहते हैं।
दंगल में विशेष तौर पर अमेरिका से नीटू कुमार पुत्र पूर्ण चंद ने दो लाख रुपये के पुरस्कार प्रदान किए। तहसीलदार सोहन लाल राणा, एडीपीओ सुरेन्द्र सिंह, दवेंद्र सिंह मोती, बबल गुप्ता, राजेश्वर शर्मा, विक्की कुमार, सानू शर्मा, यशवीर सिंह सहित कई लोगों ने हमें यह पुरस्कार पेंट किए थे।
इस मौके पर सुरजीत भगत, डॉक्टर राजीव भगत, योगेश शर्मा, राजन शर्मा, कुलबीर सिंह, प्रेमपाल शर्मा, सचिन शर्मा, राकेश शर्मा, चरणदास मेहरा, पिंटा भाटिया, नंद किशोर सहित कई लोगों ने सहयोग दिया।
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भीड़ होती रही बेकाबू
दंगल में इतनी भीड़ पहुंची कि उन पर काबू पाने के लिए पुलिस और आईटीबीपी के जवानों को काफी संघर्ष करना पड़ा। बार-बार अनाउंसमेंट भी होती रही कि दर्शक अपनी दीर्घा में ही बैठें, आगे ना आएं, लेकिन फिर भी लोग दंगल देखने के लिए इतने उत्सुक थे कि वह बार-बार सीमाएं लांघ रहे थे।