किन्नरों की अपनी अलग दुनिया है। इसी दुनिया में रिश्ते-नातों की तलाश की जा रही है। रिश्तों की डोर में बंधने को हर किन्नर बेताब है। मौका है यहां चल रहे किन्नरों के सम्मेलन का। इसमें देशभर के लगभग डेढ़ हजार किन्नर शामिल हैं। नाच-गाने के बीच मां, चाची, बेटा, बहन और बेटी के रिश्ते तलाशे जा रहे हैं।
रिश्ते तय हो जाने के बाद वे आपस में प्यार तथा स्नेह न्योछावर कर रहे हैं। गिफ्ट भी बांटे जा रहे हैं। रिश्ते के बंधन में बंधने का सिलसिला सम्मेलन की समाप्ति तक चलेगा। कनाल रोड स्थित चंद्रभागा कम्युनिटी सेंटर में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बंगाल, हिमाचल प्रदेश सहित देशभर के किन्नर जुटे हैं।
सम्मेलन यों तो गुरु कांता माई की याद में आयोजित है, लेकिन रिश्तेदारों की तलाश भी की जा रही है। किन्नरों का मानना है कि वे अपनी जिंदगी से खुश तो हैं, लेकिन रिश्तों की कमी कभी कभार खलती है। इस वजह से अपनी बिरादरी के बीच ही रिश्ते तलाशे जाते हैं।
रिश्तों के बंधन में बंधने के बाद सभी एक परिवार की तरह व्यवहार करने लगते हैं। इससे उनकी जिंदगी में रिश्तों का खालीपन दूर जाता है।