सरकारी विभागों में बाबुओं की दंबगई और मनमानी को खत्म करने के लिए केंद्र ने ‘राइट टू इंफार्मेशन एक्ट’ पास किया, जिसके चलते लोगों में थोड़ी जागरूकता आई, तो विभागों से हर प्रकार की सूचनाएं मांगी जानी लगीं, जिसमें उन्होंने अपनी कई समस्याओं के समाधान भी ढूंढ निकाले।
आरटीआई में तीस दिन के अंदर जवाब देने की बाध्यता है, अन्यथा संबंधित लोगों को जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। जिला उपायुक्त जम्मू के कार्यालय में एक साल में 400 से ज्यादा लोगों ने आरटीआई लगाई गईं, जिसमें अधिकतर मामले भूमि पर अतिक्रमण होने के सामने आए हैं।
पीडि़त लोगों ने डीसी आफिस में आरटीआई डालकर जमीन से जुड़े कई रिकार्ड की सूचनाएं मांगी है, जिसमें भूमाफिया ने अनपढ़, मृतकों के नाम फर्जी दस्तावेज और जबरन कब्जा करके हजारों कनाल भूमि पर कब्जे किए हैं।
हजारों लोगों के चल रहे हैं केस
सूचना में पुराना रिकार्ड हासिल करने के बाद पीडि़त न्याय के लिए और अपनी जमीन हासिल करने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं, लेकिन बदकिस्मती कैसी है कि उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन के लिए ही भूमाफिया से उलझना पड़ रहा है। जिला उपायुक्त जम्मू में जहां सैकड़ों मामले भूमाफिया द्वारा जमीन पर कब्जा करने के सामने आए हैं।
डिवीजनल कमिश्नर कार्यालय में संभाग भर के हजारों लोगों के केस चल रहे हैं, जिसमें कोर्ट के फैसले आने का इंतजार किया जा रहा है। इसके अलावा बिजली, पानी, सड़क, गलियां, नालियां आदि मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए आरटीआई डाली गई हैं।
जिसमें क्या यत्न किए गए, कितने पैसे खर्च किए, कितने बकाया है, संबंधी सूचनाएं मांगी गई हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में विभागों की ओर से लोगों को सूचनाएं उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। लोग परेशान हैं और लगातार रिमाइंडर भेजने को मजबूर हैं।