रियासत के युवाओं के एक बड़े वर्ग में क्षमता से अधिक खानपान और ज्यादा प्रोटीन युक्त दवाइयों का सेवन से यूरिक एसिड की शिकायत बढ़ी है। यूरिक एसिड से अर्थराइटिस की समस्या से भी युवा ग्रस्त हो रहे हैं। इस बीमारी से शहर के युवा ज्यादा प्रभावित हैं। जीएमसी में पहुंचने वाले ऐसे मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
जीएमसी में सामान्य में हड्डी के रोगियों की 250-300 ओपीडी में 5-10 प्रतिशत ऐसे युवा पहुंच रहे हैं, जो यूरिक एसिड बढ़ने से दर्द से परेशान हैं। चालीस की उम्र में होने वाला यह दर्द अब 25-30 साल के युवाओं को परेशान कर रहा है। इसकी वजह है फास्ट फूड का क्रेज, असंतुलित भोजन और शरीर को आधुनिक सुविधाओं में ज्यादा आरामदायक बनाना।
जीएमसी में कार्यरत आरथो विशेषज्ञ डा. अब्दुल गनी के अनुसार बदलती जीवन शैली से युवाओं को यूरिक एसिड की समस्या बढ़ी है। इसमें पैर के अंगुठे में अचानक दर्द होता है, जो असहनीय होकर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।
जल्द-जल्दी मसल्स बनाने के चक्कर में
संभाग के युवाओं से जुड़े अधिकतर मामलों में देखा गया है कि उन्हें मध्यरात्रि में ही यूरिक एसिड बढ़ने से दर्द का अटैक हुआ है। यह समस्या उन लोगों में ज्यादा पाई जा रही है, जो शराब के साथ जमकर मांसाहारी चीजों का सेवन कर रहे हैं। इसमें शरीर में निर्धारित से ज्यादा यूरिक एसिड इकट्ठा होता रहता है, जो अचानक दर्द के रूप में बाहर आता है।
दूसरे पहलू में उन युवाओं में भी यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या रहती है जो जल्द-जल्दी मसल्स बनाने के चक्कर में ज्यादा प्रोटीनयुक्त इंजेक्शन या अन्य दवाइयां ले लेते हैं। उनमें गाउट होने की आशंका कई गुणा बढ़ जाती है।
एक दिन में एक व्यक्ति को प्रति 1 किलो पर एक ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। शरीर में सामान्य में 5 से 5.30 यूरिक एसिड होना चाहिए। लेकिन इससे ज्यादा होने की सूरत में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जोड़ों में बैठकर दर्द करना शुरू कर देते हैं।
इन बातों पर जरूर दें ध्यान
पार्टियों में फास्ट फूड से परहेज करें
रात्रि में मांसाहारी चीजों का सेवन कम करें
शराब के साथ मांसाहारी चीजें न लें
मसल्स बढ़ाने को ज्यादा प्रोटीनयुक्त पदार्थ न लें
व्यायाम को रोजमर्रा जिंदगी का हिस्सा बनाएं