- सालाना 28000 पासपोर्ट बढ़ गए जम्मू में, दूसरे देशों में जाने वाले राजोरी-पुंछ के लोग सबसे आगे
- रोजगार, कारोबार, शिक्षा और पैसे की ललक, प्रदेश में हर साल औसतन जारी हो रहे दो लाख पासपोर्ट
जम्मू। जम्मू कश्मीर के युवाओं को विदेश की हवा लुभा रही है। विदेशी सैलानियों को जहां कश्मीर की वादियां, बर्फ और जम्मू के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल आकर्षित कर रहे हैं तो वहीं प्रदेश के युवा रोजगार, कारोबार, शिक्षा और पैसे की ललक के लिए दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं। इसमें 30 से 45 वर्ष की आयु वाले अधिक लोग हैं।
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में पासपोर्ट जारी करने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में हर साल औसतन दो लाख पासपोर्ट जारी हो रहे हैं। जम्मू संभाग पर नजर दौड़ाएं तो यहां के दस जिलों में राजोरी-पुंछ जिले के लोग बाहरी देशों में जाने के लिए सबसे आगे हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्र जम्मू पर ही एक साल में 28 हजार तक पासपोर्ट बनवाने वाले बढ़ गए हैं।
दूसरे देशों में जाने की ललक बढ़ने से पासपोर्ट कार्यालयों को हर साल आवेदन कोटा बढ़ाना पड़ रहा है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे स्थानीय नागरिक हैं जो दूसरे देशों में जाकर एनआरआई (नाॅन रेजीडेंट इंडियन) बन रहे हैं। इनमें अधिकांश रोजगार, कारोबार, पेशे या किसी अन्य कारणों से लंबे समय तक भारत से बाहर रहते हैं। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय जम्मू (आरपीओ) में वर्ष 2023 में पासपोर्ट आवेदन के लिए प्रत्येक दिन में आनलाइन अधिकतम 250 आवेदन लिए जाते थे। जिसमें 220 पासपोर्ट और 30 अतिरिक्त सेवाओं के लिए होते थे। इनमें हर माह (रविवार और सरकारी छुट्टियों को छोड़कर औसतन 24 दिन में) करीब 4800 (औसतन 200 के हिसाब से) और साल में करीब 57600 पासपोर्ट जारी होते थे। लेकिन बाहरी देशों में नागरिकों की बढ़ती मांग को देखते हुए वर्ष 2024 में आवेदन संख्या बढ़ाकर 350 कर दी गई। जिससे हर माह औसतन 7200 (औसतन 300) और हर साल 86400 तक पासपोर्ट जारी हो रहे हैं, यानी एक साल में 28 हजार से अधिक आवेदनकर्ता बढ़ गए हैं। यह आंकड़ा लगातार साल दर साल बढ़ रहा है। दिसंबर 2024 में 9000 पासपोर्ट जारी किए गए। इस कार्यालय से वर्ष 2023 में पासपोर्ट के लिए 85566 आवेदन आए थे। इसमें 78172 आवेदनकर्ताओं को पासपोर्ट व अन्य सेवाएं प्रदान की गईं।
इसी तरह कठुआ, राजोरी और उधमपुर के पासपोर्ट सेवा केंद्र में रोजाना 50-60 तक आवेदन लिए जा रहे हैं। जिसमें राजोरी केंद्र लगभग पैक चल रहा है। जम्मू संभाग में इसी केंद्र पर सबसे अधिक आवेदन आ रहे हैं। पासपोर्ट कार्यालय, जम्मू अप्रैल 1994 में अस्तित्व में आया था। यह जम्मू संभाग के 10 जिलों जम्मू, डोडा, कठुआ, पुंछ, राजोरी, उधमपुर, सांबा, रामबन, किश्तवाड़, रियासी के पासपोर्ट की बढ़ती मांग को पूरा कर रहा है। एनआरआई के लिए संबंधित दूतावास से औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। वहीं, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) श्रीनगर की ओर से 2024 में एक लाख से अधिक पासपोर्ट जारी किए गए, जो 2023 में जारी किए गए पासपोर्ट की तुलना में करीब 13,000 से अधिक की वृद्धि थी। इसी तरह कश्मीर में 2022 में 74000 से अधिक पासपोर्ट जारी किए गए। कई एनआरआई मूल देश में अहम योगदान देते हैं। अध्ययन के लिए विदेश जाने वाले छात्रों को भी एनआरआई माना जाता है। एनआरआई फेमा के तहत मिलने वाली सभी सुविधाओं के लिए पात्र होते हैं। विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें एनआरआई, भारतीय विदेशी नागरिक (ओसीआई) और भारतीय मूल के व्यक्ति शामिल हैं।
ऐसे बनता है पासपोर्ट
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय जम्मू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पासपोर्ट बनाने के लिए आनलाइन आवेदन करना होता है। इसमें सामान्य आवेदनकर्ता से स्थानीय पता (विभिन्न माध्यम से), डोमिसाइल आदि दस्तावेज लिए जाते हैं। जबकि सरकारी कर्मचारी से उसके संबंधित विभाग की एनओसी ली जाती है। आवेदन प्राप्त होने के बाद आवेदनकर्ता को भौतिक रूप से बुलाया जाता है, जिसके बाद दस्तावेजों को सत्यापन के लिए पुलिस सीआईडी के पास भेजा जाता है। सत्यापन की रिपोर्ट आने के अगले ही दिन पासपोर्ट जारी करने का प्रावधान है।
सुरक्षा कारणों से जटिल है सत्यापन
आवेदनकर्ता के सत्यापन के लिए जितनी जल्दी पुलिस (सीआईडी) की क्लीयरेंस प्रक्रिया हो जाती है उन मामलों में जल्द पासपोर्ट जारी करने का दावा किया गया है। लेकिन जम्मू कश्मीर के आतंकग्रस्त क्षेत्र होने के कारण इस प्रक्रिया में थोड़ी जटिलता रहती है। जिससे सत्यापन में देरी होती है। विदेश मंत्रालय सत्यापन प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए स्थानीय पुलिस प्राधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में पासपोर्ट शिविरों की संख्या बढ़ाने की संभावना तलाशी जा रही है।
आवेदकों की बढ़ रही संख्या : आरपीओ
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी (आरपीओ) जम्मू राजेश कुमार के अनुसार, हर साल पासपोर्ट के लिए आवेदनकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है। हम सभी को बेहतर सेवाएं प्रदान करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। अब सत्यापन औपचारिकताएं पूरी होने के साथ ही अगले दिन पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं।
रोजगार के साधन बढ़ें तो बाहरी देशों में जाने का चलन रुक सकता-अर्थशास्त्री
जम्मू विश्वविद्यालय में कार्यरत अर्थशास्त्री प्रोफेसर डाॅ. एफके सूदन का कहना है कि जम्मू कश्मीर से हर साल बड़ी संख्या में विशेषतौर पर युवा बाहरी देशों में प्रमुख रूप से शिक्षा और रोजगार के लिए जा रहे हैं। जम्मू संभाग से खासतौर पर राजोरी-पुंछ से बड़ी संख्या में लोग पासपोर्ट के माध्यम से गल्फ देशों में श्रम कार्यों के लिए जा रहे हैं। इसी तरह प्रदेश के अन्य हिस्सों से छात्र बीजा के माध्यम से युवा बाहरी देशों में जा रहे हैं, जिनकी वापस लौटने का प्रतिशत बहुत कम होता है। वे स्थानीय बीटेक करके बाहरी देशों में उच्च शिक्षा में एमटेक, एमबीए, पीएचडी आदि करके एडजेस्ट हो रहे हैं और वहीं पर बस रहे हैं। इसका एक बड़ा प्रभाव उनके बुजुर्ग अभिभावकों पर देखा जा रहा है जो पीछे से अकेले हो रहे हैं। शहर के कई पाश इलाकों में ऐसे बुजुर्ग मिल जाएंगे। जम्मू कश्मीर में रोजगार के अवसर बढ़ाकर और युवाओं का रोजगार सुनिश्चित करके बाहरी देशों में उनके जाने के चलन को कम किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है।
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