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पढ़िए, जम्मू यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. अशोक आइमा का स्पेशल इंटरव्यू

Mon, 18 Jan 2016 11:47 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, जम्मू
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जम्मू में केंद्रीय विश्वविद्यालय की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई। थोड़े से ही अंतराल में विश्वविद्यालय ने अध्ययन-अध्यापन के क्षेत्र में मानदंड स्थापित करने की कोशिश की है। विश्वविद्यालय को बुलंदियों पर ले जाने के लिए अर्जुन की तरह लक्ष्य और उद्देश्य स्पष्ट हैं। विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने का ही काम नहीं कर रहा, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व विकास की दिशा में प्रयासरत है। विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. अशोक आइमा से विभिन्न मुद्दों पर बृजेश कुमार सिंह ने बातचीत की। पेश है अंश-
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आठ नए कोर्स होंगे शुरू
विश्वविद्यालय में फिलहाल 13 कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इसमें इंटीग्रेटेड एमफिल एवं पीएचडी भी शामिल है। आए नए कोर्स शीघ्र शुरू किए जाएंग। इसमें पंचवर्षीय भौतिकी, रसायन शास्त्री, प्राणि विज्ञान व वनस्पति विज्ञान में पंचवर्षीय आनर्स, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, मालीक्यूलर बायोलाजी एंड बायोकेमेस्ट्री, मेटेरियल साइंस एंड नैनो टेक्नालाजी शामिल है।

संस्कृति के विकास के लिए खुलेगा केंद्र
विश्वविद्यालय संस्कृति के उत्थान तथा विकास की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके लिए सेंटर फार कंपरेटिव रिलीजन एंड सिविलाइजेशन, लिंग्विस्टिक की स्थापना इसी वर्ष की जा रही है। इसमें रियासत के शारदा भाषा पर काम होगा। अब इस भाषा के विषय में बहुत ही कम लोग जानते हैं। इसके साथ ही पहाड़ी भाषा गोजरी, डोगरी के विकास पर भी काम होगा। कोशिश होगी कि यहां की संस्कृति को न केवल संरक्षित किया जाए बल्कि देशभर में प्रचारित किया जा सके।
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बिजनेस आइडिया के लिए सेंटर
विश्वविद्यालय में बिजनेस आइडिया बढ़ाने के लिए इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की गई है। सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय की सहायता से स्थापित इस सेंटर में लोग किसी भी बिजनेस के लिए आइडिया पर काम कर सकते हैं। इसका फायदा यह होगा कि लोग अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे। साथ ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होंगे और रियासत तथा राष्ट्र के विकास में योगदान सुनिश्चित हो सकेगा।

स्वरोजगार के लिए प्रयास
विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं को स्वरोजगार तथा हुनर विकसित करने की दिशा में भी विश्वविद्यालय की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए वीएलसीसी से करार किया गया है। सात लाख रुपये की लागत से लैब तैयार किया गया है। यहां छात्राओं को ब्यूटी एंड वेलनेस पर हुनर का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे ज्ञान के साथ ही अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

शोध पर जोर, पांच से करार
विश्वविद्यालय का पूरा जोर शोध पर है। इसके लिए पांच करार किए गए हैं। इसमें मेलबोर्न, नेस्काम, आश्रय, हिमाचल सेंट्रल यूनिवर्सिटी, कश्मीर विश्वविद्यालय शामिल हैं। ग्वालियर की भी एक संस्था से करार किया गया है। कोशिश है कि विश्वविद्यालय शोध के क्षेत्र में अव्वल रहे।

वाई-फाई से लैस होगा विश्वविद्यालय
राया मोड से विश्वविद्यालय तक चार लेन सड़क बनेगी। इसके लिए 113 करोड़ रुपये मिले हैं। बिजली-पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं की भी स्थापना की दिशा में काम प्रगति पर है। 4.46 करोड़ रुपये की लागत से पूरे विश्वविद्यालय परिसर को वाई-फाई सुविधा से लैस किया जाएगा। वीसी के पद पर कार्यभार ग्रहण करने से लेकर अब तक 164 करोड़ रुपये का फंड मिला है। केंद्र तथा राज्य दोनों ही सरकारें विश्वविद्यालय के विकास के लिए भरपूर सहयोग दे रही हैं।

चार गांव गोद लिए
विश्वविद्यालय ने सामाजिक तथा सामुदायिक विकास के दायित्व का ख्याल रखते हुए विश्वविद्यालय के आस-पास के बागला, राया सुचैनी सहित चार गांवों को गोद लिया है। दो गर्ल्स स्कूल के अध्यापकों को भी प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठाया गया है। छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में एक केंद्रीय विद्यालय की स्थापना को मंजूरी मिल गई है। जल्द ही इसका काम शुरू हो जाएगा।
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