बेटियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए ऊंची उड़ान भरने से नहीं हिचकना चाहिए। आज उनके सामने खुला आसमान है, बस जरूरत है दृढ़ इच्छाशक्ति की। भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से महज सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित गढ़ गांव की रजिया ठाकुर ने इसे सच साबित कर दिखाया है।
रजिया लड़कों और लड़कियों में बराबरी की पक्षधर हैं। दिसंबर 2014 में एक गांव से निकलकर फ्लाइंग अफसर बनने तक का सफर पूरा करने वाली रजिया देश सेवा के लिए अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हैं।
हीरानगर सब डिवीजन से पहली महिला फ्लाइंग आफिसर बनने वाली रजिया ग्रेजुशन की पढ़ाई के दौरान प्रशासनिक सेवा को लक्ष्य बनाकर तैयारी कर रही थीं, लेकिन प्रदेश स्तरीय शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने और रजत पदक जीतने से उनको कुछ अलग प्रेरणा मिली। शूटिंग प्रतियोगिता ने उनको नया लक्ष्य दिया।
वह लक्ष्य था सैन्य बल में अफसर बनकर देश सेवा करना। जब उन्होंने लक्ष्य को पाने के लिए कोशिशें शुरू कीं, तो परिवार के सदस्यों ने पूरा साथ दिया। प्रशिक्षण अकादमी से मिली तकनीकी सहायता की बदौलत रजिया को लक्ष्य तक पहुंचने का हौसला मिला।