आत्मविश्वास के साथ जिंदगी जीने का मकसद खास हो तो सफलता हर हाल में कदम चूमती है। 28 वर्षीय डा. सईद सहरीश असगर इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। वर्ष 2013 में 23वीं रैंक हासिल कर जम्मू-कश्मीर की पहली मुस्लिम महिला आईएएस अधिकारी बनने का कीर्तिमान स्थापित करने से पहले सहरीश आईपीएस भी क्वालीफाई कर चुकी हैं।
कश्मीर प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2011 की टॉपर रही हैं। दरअसल सहरीश ने रियासत में लड़कियों की कम साक्षरता दर और प्रशासनिक सेवाओं से दूरी को चुनौती के रूप में लिया और उसे हासिल कर दूसरों के लिए प्रेरणा बन गईं। पंजाब काडर की आईएएस अधिकारी सहरीश मौजूदा समय में लुधियाना में असिस्टेंट कमिश्नर (ट्रेनिंग) के पद पर तैनात हैं।
अमर उजाला से बातचीत में सहरीश ने मन की बात साझा की। उनका कहना है कि लड़कियां किसी भी मामले में लड़कों से कम नहीं है। जरूरत है तो बस उनमें आत्मविश्वास पैदा करने की। ऐसा होने पर वह किसी भी मुकाम को छू सकेंगी। आत्मविश्वास और धैर्य के साथ लड़कियां लक्ष्य निर्धारित करें तो ऐसा कोई भी लक्ष्य नहीं है, जिसे वह हासिल नहीं कर सकतीं।
सहरीश का कहना हैं कि बचपन से ही उनका सपना आईएएस अधिकारी बनने का था। पिता केएएस अधिकारी थे। उनसे भी प्रेरणा मिली। माता ईरशादा बानो से लेकर शिक्षकों और सहपाठियों से भी सीखा और प्रेरणा मिला। पूरे परिवार का भरपूर सहयोग मिला।
'सफलता का कोई शार्टकट नहीं'
प्रजेंटेशन कांवेंट गांधीनगर से स्कूली शिक्षा हासिल करने वालीं सहरीश ने एस्काम (बत्रा) अस्पताल से एमबीबीएस किया। डाक्टर बनने के बाद भी वह अपने लक्ष्य के लिए जुटी रहीं। उन्होंने केएएस और आईपीएस क्वालीफाई किया, लेकिन सपना तो आईएएस बनने का था, जो 2013 में पूरा हुआ।
डा. सईद सहरीश असगर का कहना हैं कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं है। दृढ़ इच्छा शक्ति से कोई भी आईएएस तो क्या प्रधानमंत्री भी बन सकता है। उनका कहना हैं कि जम्मू कश्मीर की लड़कियां प्रतिभाशाली हैं। आत्मविश्वास हो तो वह कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।
सहरीश बालिकाओं और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करवाना चाहती हैं। उनके पति डा. आबिद रशीद भी आईएएस अधिकारी हैं और श्रीनगर में एसडीएम पद पर तैनात हैं।
बेटी की कामयाबी से पिता फूले नहीं समाते
सहरीश के पिता सईद असगर अली जो मौजूदा समय में पीडीपी के एमएलसी हैं, बेटी की सफलता पर फूले नहीं समाते। कहते हैं कि उनकी बेटी ने जम्मू-कश्मीर में पहली मुस्लिम महिला आईएएस और आईपीएस क्वालीफाई करने का गौरव हासिल किया है, इससे उनका सिर फख्ऱ से ऊंचा तो हुआ ही है, पूरी रियासत के लोगों खासतौर से बेटियों को एक संदेश मिला है।
सईद असगर अली स्वयं भी रियासत के केएएस अधिकारी रह चुके हैं। उन्हें चिनाब घाटी से पहले केएएस अधिकारी बनने का गौरव हासिल है। उनकी बड़ी बेटी डा. फरहाना भी केएएस अधिकारी है। बेटे ने एमबीए किया है।