हंगामे के बीच बीफ बिल को नामंजूरी पर नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जैसे कहा जा रहा है कि हम सदन की कार्यवाही को सामान्य रूप से चलने नहीं दे रहे। यह गलत है।
सदन के स्पीकर हैं, जो कार्यवाही को नहीं चलने दे रहे हैं। स्पीकर ने विवादित बयानों से साबित कर दिया है कि वह सदन के संरक्षक नहीं हैं। एक स्पीकर को जाति, पंथ, धर्म से हटकर फैसले लेने चाहिए।
हमारी ओर से एक स्थगन प्रस्ताव रखा गया था। यह जानने के लिए कि बीफ बैन को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाने के पीछे क्या कारण थे। यदि विधानसभा क्षमता रखती है, तो उसके अधिकारों को क्यों छीना गया।
मुफ्ती अपनी सरकार बचाना चाहते हैं, इसलिए मुद्दों को सुप्रीम कोर्ट पहुंचाते हैं। वीमेन बिल को भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचाया, जो अब तक लंबित है। ऐसा इसलिए भी किया, ताकि चर्चा करने की मांग पर वह कह सकें कि मामले न्यायाधीन हैं।
उमर के अनुसार यदि स्पीकर ने इन कारणों को स्पष्ट करने दिया होता, तो सदन में हंगामा नहीं होता। इंजीनियर रशीद ने कहा कि स्पीकर आरएसएस के एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं। स्पीकर बीफ बैन बिल पर स्पष्ट रुख रखें।
उन्होंने कहा कि यह जगह खाली आलू, प्याज की कीमतें तय करने के लिए नहीं बनी, बल्कि यहां सियासी, विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ लोगों की भावनाओं को लेकर भी चर्चा होनी चाहिए।