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Jammu News: सोपोर फल मंडी परिवहन की कमी और मांग में गिरावट से जूझ रही है

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सोपोर की फल मंडी। संवाद
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सोपोर फल मंडी परिवहन की कमी और मांग में गिरावट से जूझ रही हैसेब उद्योग को करीब 2,000 करोड़ से अधिक का हुआ नुकसान रेलवे बुकिंग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की मांग की
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साकिब नबी
बारामुला। एशिया की दूसरी सबसे बड़ी फल मंडी सोपोर फल मंडी के फल उत्पादकों और व्यापारियों ने इस महीने परिवहन की कमी और सुस्त मांग के कारण बढ़ते नुकसान पर चिंता जताई है। व्यापारियों के अनुसार इस व्यवधान के कारण कई फल उत्पादक भारी कर्ज के बोझ तले दब गए हैं और कई व्यवसाय पहले से ही बैंक ऋणों में फंसे हुए हैं।
उनका अनुमान है कि नुकसान 2,000 करोड़ से अधिक हो गया है और उन्होंने सरकार से तत्काल मुआवजा और राहत उपाय करने का आग्रह किया है। सोपोर फल मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष फैयाज अहमद मलिक उर्फ काका जी ने परिवहन लागत में तेजी को एक बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि ट्रकों की भारी कमी से बढ़ते किराये और भी बदतर हो गए हैं जिससे व्यापारियों के लिए अपना काम जारी रखना असंभव हो गया है।
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श्रीनगर-जम्मू हाईवे बंद रहने से हमारे कारोबार पर बहुत प्रभाव पड़ा है। ऐसा नुकसान अभी तक इससे पहले कभी नहीं देखा, सब ठप कर दिया है। एक स्थानीय किसान मंजूर अहमद ने बताया कि इस समय किराया इतना ज्यादा हो गया है कि वो अपना माल यहां स्थानीय बाजारों में बेचने के लिए मजबूर हो गए हैं। जो देब बाहर के बाजारों में 150-200 रुपए प्रति किलो बिकता था वो आज श्रीनगर के बाज़ारों में 100 रुपए का चार किलो बिक रहा है।
गौरतलब है कि उत्पादकों और व्यापारियों ने यह भी मांग की है कि सरकार सोपोर रेलवे स्टेशन से सीधे रेल संपर्क की संभावना तलाशे ताकि फलों की लदान और परिवहन सुगम हो सके। उनका मानना है कि रेल संपर्क ऐसे संकट के समय एक विश्वसनीय और किफायती विकल्प होगा जिससे इस क्षेत्र पर दबाव कम होगा। काका जी ने बातचीत में कहा कि बारामुला स्टेशन से एक ही ट्रेन गई लेकिन उसके बाद से इसमें भी एजेंट घुस गए। कोई 60 रुपये तो को 93 रुपए एक डब्बे का किराया बताता था। लेकिन जब पता चला कि असली रेट 43 रुपए है तो किसी ने नहीं भेजा माल। इसमें दुख की बात यह है कि कोई भी रेलवे अधिकारी सीधे संपर्क नहीं करता। हमारी मांग है कि एक तो रेल सेवा रोजाना चलाई जाए और बुकिंग के लिए रेलवे का सिंगल विंडो सिस्टम हो।
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