जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की चुनौती भले ही बड़ी मानी जाती हो, लेकिन सरहदी इलाकों की निगहबानी के सामने मौसम की चुनौती इससे भी बड़ी साबित हो रही है। खून जमा देने वाली सर्द सरहद वाला सियाचिन ग्लेशियर तो और भी कुख्यात है। यहां बर्फीला तूफान ही नहीं, अत्यधिक ठंड का कालचक्र हर साल कई जवानों की जान ले लेता है।
जम्मू-कश्मीर में एलओसी (नियंत्रण रेखा) और एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) से लेकर बर्फ से ढके रहने वाले अन्य इलाकों में सुरक्षा बलों की मौतों का आंकड़ा हैरान करने वाला है। रक्षा विभाग के अनुमान में यह आंकड़ा आठ हजार से अधिक है।
ज्यादातर मौतें बर्फीले तूफान से हुई हैं लेकिन हिमस्खलन के अलावा भूस्खलन, फ्रॉस्ट बाइट, अल्टीट्यूड सिकनेस और हार्ट अटैक के मामले तकरीबन हर साल रिपोर्ट होते हैं।रियासत में आतंकवाद पिछले करीब तीन दशक से है।