सात दिनों तक प्राकृतिक आपदा की मार झेलने के बाद अब श्रीनगर और कश्मीर घाटी के अन्य इलाकों में बाढ़ का जलस्तर घटने लगा है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ एनडीआरएफ टीम, अर्द्धसैनिक बल और पुलिस दल अब लोगों को भोजन-पानी भी सप्लाई कर रहे हैं।
जिन इलाकों में जलस्तर घटा है, वहां भी लोग खाने-पीने का सामान तलाशने लगे हैं। झेलम के टूटे तीन बांधों में से जिस एक बांध से लगातार पानी आ रहा था, वह सातवें दिन बंद हो गया। इससे पानी की निकासी में काफी मदद मिली।
पुलिस लाइन, इकबाल पार्क, सचिवालय में बाढ़ के पानी का स्तर घटा है। हालांकि इसके बावजूद शनिवार को राजबाग, खूरसू, इखराज पुरा, जवाहर नगर में दस-दस फुट तक पानी बना हुआ है।
पानी फिल्टर करके दे रही हैं केंद्रीय एजेंसियां
डल गेट से मौलाना आजाद रोड तक पानी भरा हुआ है। हमेशा सैलानियों से गुलजार रहने वाले डल झील इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर, स्टेट गेस्ट हाउस, मंत्रियों के बगलों, सोनावार चौक, जीरो ब्रिज पानी में डूबे हुए हैं।
कश्मीर घाटी में जिन इलाकों में पीने के पानी की समस्या बनी हुई है, वहां केंद्र सरकार की एजेंसियां पानी फिल्टर कर मुहैया करवा रही हैं। केंद्र सरकार की पहल पर स्मार्ट एजेंसी की टीमें कश्मीर घाटी पहुंची हैं।
उनके पास पानी फिल्टर करने की मशीनें हैं। वह नाव के जरिए लोगों के घर पहुंच उनके पास उपलब्ध पानी फिल्टर कर देते हैं।
छप्पर फाड़ कर दे रही है सेना
आसमान में उड़ते हेलिकाप्टर को देखकर लोगों की उम्मीदें जाग उठती हैं। बच्चे भोजन के लिए घर की रसोई की तरफ नहीं, बल्कि सेना के हेलिकाप्टर का इंतजार करते हैं। सेना भी लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में जुटी हुई है।
घरों के छतों पर खाना फेंका जा रहा है। पानी, फल, शकरपारे, बिसकुट, पका भोजन, हर तरह रिलीफ पहुंचाने में वायु सेना के हेलिकाप्टर दिन-रात आकाश में उड़ रहे हैं।
दूरदराज क्षेत्रों में पहाड़ियों से हैलीकाप्टर को जब लोग देखते हैं तो हाथ हिलाकर, कपड़े उड़ाकर संकेत देते हैं और मदद मांगते हैं। बदले में जब उनके लिए आसमान से फूड पैकेट फैंके जाते हैं जो मुसीबत में फंसे लोगों के लsिए इस वक्त उनके लिए अमृत से कम नहीं है।