14 साल पहले रावलपोरा के एक केमिस्ट के हिरासत में लापता होने के मामले में जम्मू कश्मीर पुलिस की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम(एसआईटी) ने एक आर्मी ऑफिसर पर अपहरण, हत्या और सबूतो को मिटाने का न्यायालय में दोषी ठहराया है। आर्मी ऑफिसर अब ब्रिगेडियर है।
एसआईटी ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में कहा कि वह अधिकारी पर मुकदमा चलाने के लिए अभी केन्द्र सरकार का मंजूरी का इंतजार कर रही है। 35 वर्षीय मंजूर अहमद दर एक केमिस्ट के तौर पर काम करता था। जब उसे उसके घर से अज्ञात बंदूकधारियों को ढूंढ़ने के लिए 18-19 जनवरी 2002 की रात हिरसात में लिया गया था।
इसके बाद प्रदर्शन हुए, जिसके बाद पुलिस ने आरपीसी की धारा 364 के अंतर्गत 35 राष्ट्रीय राइफल्स के आर्मी ऑफिसर पर मुकदमा दर्ज किया था। बाद में जांच के दौरान मेजर किशोर मल्होत्रा का नाम सामने आया। जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में एसआईटी ने कहा है कि जांच पूरी हो गई है और वो इस मामले में केन्द्र सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही है।
एसआईटी ने रिपोर्ट में कहा कि हिरासत में लापता होने का मामला में साफ है कि 35 राइफल्स की कस्टडी में ही युवक की मृत्यु हुई थी। जिसके बाद आरपीसी की धारा 302 में मुकदमा दर्ज किया गया था। अपहरण के अपराध के चलते ब्रिगेडियर मल्होत्रा के खिलाफ अपहरण की धारा आरपीसी 364 में भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसआईटी ने ये भी बताया कि जांच में युवक के किसी भी संदिग्ध चीजों में लिप्त होना सामने नहीं आया है। इस साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने ब्रिगेडियर को जांच में एसआईटी की मदद करने का निर्देश दिया था।