श्वेता के बहन के साथ सुखद दिनों की तस्वीरें
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दीदी अब नहीं आएगी…, आ जाए तो हम कभी नहीं लड़ेंगे
श्वेता की बहन सुहानी जीएमसी जम्मू में लैब असिस्टेंट की ट्रेेनिंग कर रही है। भाई नक्श अभी छोटा है और पास के ही स्कूल में पढ़ने जाता है। रो-रोकर दोनों थक चुके हैं। मां को बिलखता देख वे उसे चुप कराने की कोशिश करते हैं। दोनों एक दूसरे से बस यही कहते रहे कि दीदी अब नहीं आएगी...आ जाओ दीदी, हम कभी नहीं लड़ेंगे।
अलर्ट भी रहें माता-पिता, बच्चों से संवाद की पहल खुद करें
उदयपुर हो या गुरुग्राम…, दुर्भाग्यवश इस तरह की घटनाएं आम होती जा रही हैं। अभिभावकों के लिए यह एक संकेत है संवाद की पहल करने का। बच्चा यदि संवाद करने से कट रहा है तो खुद को दूर करके उसके जीवन में एक रिक्त स्थान न छोड़ें।
यह कहना है मनोचिकित्सक डा. मनजीत सिंह का। सिद्धड़ा में आचार्य श्री चंद्रशेखर कालेज आफ मेडिकल साइंसेज एक हास्पिटल में प्रो.एंड हेड डा. सिंह कहते हैं कि सोशल मीडिया पर हमेशा हंसता-खिलखिलाता चेहरा खुश हो, सुखी हो यह सच नहीं। खासकर बच्चों के मामले में हमें सतर्क रहना होगा।
बच्चों को ये भी बताएं-सिखाएं- हालात से लड़कर जीता जाता है, आत्महत्या किसी भी मुद्दे का हल नहीं
बच्चे यह मानते हैं कि सारे रास्ते बंद हो गए, उन्हें बताएं कि यह सच नहीं-पैपरिंग ठीक है, पर बच्चे को न कहने की आदत भी डालें। आजकल बच्चों में इस वजह से भी सबकुछ पा लेने की सोच है, बर्दाश्त नहीं रह गया है।