कश्मीर घाटी में वीरवार को अलगाववादियों द्वारा बंद के आह्वान के बाद कश्मीर में जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित रहा।
अलगाववादियों ने कश्मीरी पंडितों के लिए सेपरेट टाउनशिप, सैनिक कालोनियों की स्थापना, जम्मू मुसलमानों का उत्पीड़न, भाजपा नेता चौधरी लाल सिंह की 1947 नरसंहार दोहराने की जम्मू के मुसलमानों को धमकी, नई कश्मीर विरोधी औद्योगिक नीति और जमू-कश्मीर में जनसंख्यकीय परिवर्तन के प्रयास करने के लिए बंद का आह्वान किया था।
बंद का आह्वान हुर्रियत (ग) अध्यक्ष सईद अली शाह गिलानी, हुर्रियत (म) के अध्यक्ष मीरवाइज मोलवी उमर फारूक और जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के चेयरमैन द्वारा की गई एक बैठक के बाद मिलकर दिया गया था। इसका समर्थन अन्य अलगाववादी और आतंकी संगठनों द्वारा भी किया गया था।
इस सबके चलते श्रीनगर में सभी कारोबार, स्कूल, कॉलेज आदि बंद रहे। यहां तक कि सड़कों पर से यातायात प्रभावित रहा। साथ ही सरकारी दफ्तरों में उपस्थिति प्रभावित दिखी। श्रीनगर के साथ-साथ कश्मीर घाटी के लगभग सभी जिलों में इस बंद का पूरा असर देखने को मिला।
वहीं हालातों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता किए थे। सभी संवेदनशील इलाकों में जवानों की अच्छी खासी तैनाती की गई थी, ताकि किसी प्रकार की हिंसा व अन्य हालातों को निपटा जा सके। उल्लेखनीय है कि लगभग सभी अलगाववादी नेताओं को बुधवार को ही नजरबंद रखा गया था।