जम्मू संभाग के राजोरी में डॉक्टरों की कमी के चलते आए दिन मरीजों की जान जा रही है लेकिन स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। डॉक्टर न होने की सूरत में मरीजों को जम्मू रेफर कर दिया जाता है और रास्ते में ही उनकी जान चली जाती है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग सफेद हाथी साबित हो रहा है। इलाके के 7 लाख लोगों की सेहत राम भरोसे है। जिला अस्पताल सहित लगभग सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टरों की जबरदस्त किल्लत है, इस कारण मरीजों को मामूली इलाज के लिए भी राजोरी से जम्मू का रुख करना पड़ता है।
जिले में 269 पदों में से 164 पद खाली पड़े हुए हैं। सबसे बुरा हाल आसपास के अस्पतालों का है। यहां एक से दो डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है।
हर ब्लाक का एक जैसा हाल
राजोरी के 6 ब्लाक स्वास्थ्य सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। सुंदरबनी ब्लाक में उपजिला अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों में मेडिकल आफिसर और डॉक्टरों के 37 पद खाली पड़े हैं। इनमें से अकेले उपजिला अस्पताल सुंदरबनी में ही 31 पोस्टें खाली हैं।
दरहाल ब्लाक में 33 में 24 पद खाली हैं। दरहाल और थन्नामंडी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में 12 पद खाली हैं। मांजाकोट ब्लाक में 16 में से 11 पद खाली पड़े हैं, ये हाल तब है जब यहां के विधायक तीन साल तक स्वास्थ्य मंत्री रहे।
कंडी ब्लाक में 33 पदों में से 27 खाली पड़े हैं। कंडी उपजिला अस्पताल में ही 26 में से 20 पद खाली पड़े हैं। कालाकोट ब्लाक में 33 में से 27 और कालाकोट कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में 18 में से 16 पद खाली पड़े हैं।
रेफरल सिस्टम में दम तोड़ रहे मरीज
कालाकोट, दरहाल, कंडी, मांजाकोट आदि ऐसे अस्पताल हैं, यहां से मरीजों को राजोरी के जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को रेफर किया जा रहा है, लेकिन मरीजों को राजोरी के जिला अस्पताल में भी उपचार नहीं मिल रहा।
यहां से फिर जम्मू के मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। इस रेफरल सिस्टम के चक्कर में कई मरीज दम तोड़ रहे हैं। मरीजों को प्राथमिक उपचार न मिलने से वह बड़े अस्पताल तक पहुंचने में ही दम तोड़ जाते हैं।