- कश्मीर युवा ने जिले के कई युवाओं के लिए खोले राेजगार के नए अवसर
- नौकरी के बजाय उद्यमिता के रास्ते पर चलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे
संवाद
मुजम्मिल याकूब
शोपियां। दक्षिण कश्मीर में शोपियां जिले के डूरू गांव के शोएब राशिद सहायक प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर आज अपने गांव में साबुन और डिटरजेंट पाउडर बना रहे हैं। उन्होंने यह कदम कोई अपने लिए नहीं बल्कि गांव में उद्यमिता के नए विचारों से युवाओं को जोड़ने के लिए बढ़ाया है। उन्होंने गांव में ही साबुन और डिटर्जेंट पाउडर बनाने की इकाई स्थापित की है। इससे न केवल उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिला है।
शोएब ने चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से रेडियोलॉजी में एमएससी की पढ़ाई की है। इसके बाद चंडीगढ़ में ही सहायक प्रोफेसर के रूप में काम करना शुरू किया। विश्वविद्यालय के भव्य परिसर में रहते हुए भी वह अपने गांव की जड़ों से जुड़े रहे। उन्होंने कहा, जब मैं पहली बार विश्वविद्यालय आया तो मैं सोचता था कि इतनी बड़ी इमारतें किसने बनाईं। यह पहली बार था जब मैंने अपने गांव से बाहर कदम रखा। यहां आकर एहसास हुआ कि हमारा गांव-जिला विकास में कितना पिछड़ा हुआ है। इसी सोच ने उन्हें अपने लोगों के लिए कुछ करने को प्रेरित किया।
3.5 लाख का निवेश और सफलता की मिली सीढि़यां
सिर्फ छह माह में शिक्षण कार्य छोड़कर शोएब अपने दृढ़ संकल्प के साथ गांव में लौटे। यहां आकर उन्होंने अपने परिवार के सहयोग से 3.5 लाख रुपये का शुरुआती निवेश किया और साबुन और डिटर्जेंट पाउडर बनाने की इकाई खोल ली। उनकी मेहनत और दूरदर्शिता का नतीजा जल्द ही सामने आया। महज छह महीनों के भीतर उनकी इस यूनिट ने 1.5 लाख प्रति माह की कमाई देनी शुरू कर दी। इससे क्षेत्र के चार लोगों को रोजगार भी मिला है।
उद्यम से दूसरों के लिए खुलते हैं रोजगार के विकल्प
शोएब ने कहा कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। जब आप खुद का उद्यम शुरू करते हैं तो दूसरों के लिए रोजगार के विकल्प भी खोलते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सच्ची लगन और कड़ी मेहनत हो तो अपने ही समुदाय में रहते हुए बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं।