रामनगर के एसएचओ इंस्पेक्टर दीपक पठानिया स्टेट विजिलेंस आर्गनाइजेशन के घेरे में फंस गए। डेढ़ लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में पठानिया के खिलाफ केस दर्ज किया है। जगीर घोरडी की महिला बानू ने शिकायत की कि थाने में दर्ज एफआईआर में तीन बेकसूर लोगों को बरी करने के लिए इंसपेक्टर पठानिया डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मांग रहे हैं।
विजिलेंस ने जांच में पाया कि रामनगर थाने में धारा 302 के तहत दर्ज केस में पुलिस ने तीन बेकसूर लोगों कूब अली, गाव अली और तारिक सहित कई लोगों को पूछताछ के लिए पकड़ा। आरोप है कि एसएचओ ने अन्य लोगों को तो रिहा कर दिया, लेकिन तीनों लोगों को एक माह तक गैरकानूनी ढंग से कस्टडी में रखा। इस दौरान रोजनामचे में इसे दर्ज भी नहीं किया।
तीनों लोगों के परिवार वालों ने जब एसएचओ से उनकी रिहाई के लिए संपर्क किया तो उन्होेंने उन्हें छोड़ने के लिए 50 हजार रुपये प्रति व्यक्ति मांगे। जांच में पाया कि परिवार वालों ने रुपयों की व्यवस्था की और उसे एसएचओ को दिए। विजिलेंस ने जांच के प्रथम दृष्टया में एसएचओ पठानिया को दोषी पाया और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। जेएनएफ