श्रीनगर। फ्रांस की रहने वालीं प्रोफेसर पास्कल बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए दो दिन से बालटाल में हैं। उनके साथ उनके दोस्त एड्रियन भी हैं। खगोलशास्त्री प्रो. पास्कल 19 साल से लगातार भारत यात्रा पर आ रही हैं। वह लगातार तीसरी बार अमरनाथ धाम जाएंगी। वह कहती हैं कि उन्हें श्री अमरनाथ जी यात्रा का वातावरण भा गया है। शिव उनके दिल में बसे हैं। पास्कल कहती हैं कि भारत के कोने-कोने से आने वाले हजारों लोगों की आस्था और एकता देखकर उनको बहुत खुशी मिलती है। सभी धर्मों के साथ ही वे शिव और हिंदू धर्म से अगाध प्रेम करती हैं। इस जगह पर आकर उन्हें अपार शांति और असीम ऊर्जा का अहसास होता है।
उन्होंने कहा कि यहां जाति-धर्म और ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं है। सभी के एक अराध्य बाबा बर्फानी हैं और सभी उनकी भक्ति में लीन हो जाना चाहते हैं। वह बोलीं, ‘मैं भी यही करने आई हूं।’
चारधाम यात्रा कर चुकी हैं प्रो. पास्कल : प्रो. पास्कल के साथ बालटाल आए गाइड सूर्या ने बताया कि वे उत्तराखंड में चारधाम यात्रा कर चुकी हैं। हिंदू धर्म के प्रति उनका अगाध लगाव है। उन्हें भोलेनाथ प्रिय हैं। वह लगातार तीसरे अमरनाथ यात्रा पर आई हैं।
श्री शिव शक्ति सेवा मंडल (बुढलाड़ा) पंजाब के पदाधिकारी डॉ. प्रेमचंद बताते हैं कि प्रो. पास्कल जब भी आती हैं उनके ही लंगर में प्रवास करती हैं। अन्य सेवादारों के साथ वह भी निस्वार्थ भाव से कई दिन तक श्रद्धालुओं की सेवा करती हैं। बगड़ बम बम बम लहरी... पर झूमे दोनों: सोमवार की देर शाम आरती के बाद भोलेनाथ को समर्पित कैलाश खेर का सुप्रसिद्ध गीत मोहे अपना बना लो दीनानाथ जी, बगड़ बम बम बम लहरी, महादेव शिव शंकर शंभु, बगड़ बम बम बम लहरी... बजा तो प्रो. पास्कल और एड्रियन खूब थिरके। श्रद्धालुओं के साथ दोनों झूम कर नाचे। बाबा बर्फानी की भक्ति में लीन दोनों को झूमते देख गुजर रहे श्रद्धालु खुश और हैरान रहे। उन्होंने भोले के जयकारे भी लगाए।
बालटाल में श्रद्धालुओं के साथ नृत्य करतीं फ्रांस की प्रो. पास्कल। स्रोत : श्रद्धालु- फोटो : Samvad
बालटाल में श्रद्धालुओं के साथ नृत्य करतीं फ्रांस की प्रो. पास्कल। स्रोत : श्रद्धालु- फोटो : Samvad