-पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर पुलिस गिरफ्तार तस्करों के नए पैंतरों पर कसेगी शिकंजा
-नशा तस्कर अपने क्षेत्र छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में जाकर नशा तस्कर कर रहे
अजय मीनिया
जम्मू। नशा तस्करों ने तस्करी के नए पैंतरे बरतना शुरू कर दिया है। वे अपने प्रदेश को छोड़कर दूसरे प्रदेश व राज्य में तस्करी कर रहे हैं। इसके लिए फर्जी पहचान पत्र तक बनाए गए हैं। इन तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने विशेष रणनीति बनाई है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश की पुलिस इस रणनीति का हिस्सा होगी। ये सब हर महीने अपने अपने क्षेत्र में गिरफ्तार होने वाले दूसरे क्षेत्रों के तस्करों की कुंडली साझा करेंगे ताकि इनके बारे पूरी जानकारी हासिल की जा सके।
आईजीपी सुनील गुप्ता का कहना है कि बीते एक वर्ष के दौरान जम्मू-कश्मीर में नशा तस्करी के मामलों में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के 85 नशा तस्कर गिरफ्तार हुए हैं। कुछ एएनटीएफ ने किए और कुछ पुलिस ने। अकेले पंजाब के 50 तस्कर हैं। इन तस्करों पर दर्ज मामलों की जब जांच शुरू की गई तो पता चला कि इन्होंने अपने फर्जी नाम के आधार कार्ड से लेकर आईकार्ड तक बना रखे हैं। जब इनके बारे पुलिस संबंधित राज्य व प्रदेश में अधिक जानकारी लेने पहुंची तो पता चला कि इनके नाम का कोई व्यक्ति वहां रहता ही नहीं। इसलिए एएनटीएफ ने जरूरत महसूस की कि अधिक जानकारी के लिए संबंधित पुलिस से समन्वय जरूरी है।
कैसे लेंगे जानकारी
बीते दो वर्ष में नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो में जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार होने वाले तमाम अपराधियों को राष्ट्रीय स्वचालित फिंगप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) में शामिल किया गया है। जिस जगह का कोई तस्कर गिरफ्तार होगा। तुरंत उसके बारे उसी राज्य के नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो से फिंगप्रिंट पहचान प्रणाली के जरिए जानकारी जुटाई जाएगी। आरोपी बेशक फर्जी पहचान पत्र दिखाएगा, लेकिन उसके फिंगप्रिंट से उसकी सही जानकारी मिलेगी।
एएनटीएफ ने बनाया हेरोइन डाटा सेंटर
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स जम्मू ने एक हेरोइन डाटा सेंटर भी बनाया है। इस डाटा सेंटर में हेरोइन मामलों में छूट चुके, जेल में बंद या फिर पकड़े जाने वाले 500 से अधिक तस्करों का डाटा स्टोर किया गया है। कश्मीर के 275 और जम्मू के 250 तस्करों का डाटा बना है।