जेएंडके पुलिस के 1999 बैच के केपीएस अधिकारी शैलेंद्र सिंह और शाद को साहित्य अकादमी देने की घोषणा की गई है।
गरीबी में भी प्यार को जिंदा रखने और अपने बच्चों को शिक्षित करने की प्रेरणा देने वाली डोगरी किताब हाशिये पर के लेखक जम्मू कश्मीर पुलिस के 1999 बैच के केपीएस अधिकारी शैलेंद्र सिंह को साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
इंसान की कोरे कागज जैसी जिंदगी पर ऊपर वाले की जबरन लिखावट पर खूबसूरती के साथ कश्मीरी भाषा में कविता कोरे ककुड गोम पुश्तिरथ लिखने के लिए प्रोफेसर शाद रमजान को भी यह पुरस्कार दिया गया है।
प्रोफेसर रमजान कश्मीर यूनिवर्सिटी के कश्मीरी विभाग के एचओडी हैं। शैलेंद्र सिंह ने डोगरी किताब हाशिये पर को 2010 में रिलीज किया था।
एक गरीब परिवार की कहानी बयां करने वाली इस किताब को आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अंग्रेजी में लिखने की भी मंजूरी दे दी है।
डोगरी की यह पहली किताब होगी जिसे अंग्रेजी में भी प्रकाशित किया जाएगा। इस पुरस्कार को पाकर शैलेंद्र सिंह काफी खुश हैं।
अमर उजाला से उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को शेयर करते हुए बताया कि 2009 में हाशिये पर नाम का उपन्यास लिखा था।
इसके लिए उन्हें अवार्ड भी मिला। इसके बाद 2010 में किताब लिखी। एक गरीब परिवार की जिंदगी पर आधारित इस किताब को लिखते वक्त उनके पास शब्द नहीं थे। लेकिन जब लिखना शुरू किया तो लिखते ही चले गए।
160 पन्नों पर जाकर किताब खत्म हुई। इसके बाद उन्होंने 2012 में बाल मजदूरी की हालत बयां करती किताब सेवाधानी को लिखा।
कश्मीर विश्वविद्यालय के कश्मीरी विभाग के एचओडी शाद रमजान से बात करने पर उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है।
इससे पहले उन्हें 2009 में अनहरती अकस को कई अनुवाद में लिखने के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है। दूसरी बार उन्हें यह पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।