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अब और आसान हुआ जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक इकाइयां लगाना, भूमि आवंटन नीति 2021-30 लागू

Sat, 23 Jan 2021 11:04 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : ANI
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जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक इकाइयां लगाना अब और आसान हो गया है। सरकार ने इसके लिए भूमि लेने की प्रक्रिया को सरल बनाया है। अब औद्योगिक भूमि के लिए निवेशकों को अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और न ही विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने होंगे। भूमि आवंटन की प्रक्रिया 30 से 45 दिन में पूरी कर ली जाएगी। निवेशकों को प्रारंभिक अवधि के लिए लीज पर 40 साल और बाद में विस्तार करके 99 साल तक भूमि दी जाएगी। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई प्रशासनिक परिषद की बैठक में जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास के विस्तार के लिए जम्मू-कश्मीर औद्योगिक भूमि आवंटन नीति 2021-30 को मंजूरी दी गई।

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नई भूमि आवंटन नीति के तहत ब्लॉक और नगर निगम क्षेत्र में औद्योगिक जोन को स्थापित करना प्रस्तावित है। इससे ग्रामीण स्तर पर औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। जम्मू-कश्मीर में पहले से ही औद्योगिक भूमि बैंक के लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को भूमि स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। नई नीति के तहत औद्योगिक भूमि से जुड़े सभी मुद्दों को प्राथमिकता पर हल करने का काम किया जाएगा। नई औद्योगिक भूमि आवंटन नीति में स्वास्थ्य संस्थान, मेडिसिटी, शिक्षण संस्थान और शिक्षा शहर को कवर किया जाएगा।

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इस नीति में औद्योगिक विकास के मौजूदा स्तर, प्रस्तावित क्षेत्र और शहरीस्तर सहित विभिन्न कारकों को ध्यान में रखा जाएगा। नई नीति में 30 दिन के भीतर औद्योगिक भूमि के आवंटन के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच के लिए संभाग स्तरीय परियोजना मूल्यांकन और मूल्यांकन समितियों का गठन किया जाएगा। एपेक्स स्तरीय भूमि आवंटन कमेटी, उच्च स्तरीय भूमि आवंटन समिति और संभाग स्तरीय भूमि आवंटन समिति 200 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के आवेदन में भूमि आवंटन की मंजूरी देगी। इसमें 50 से 200 करोड़ की परियोजनाएं शामिल होंगी।

नीति के तहत प्रारंभिक अवधि के लिए 40 साल और बाद में विस्तार करके 99 साल पर लीज पर भूमि दी जाएगी। इससे पहले वर्ष 2016 से भी प्रारंभिक अवधि के लिए 40 साल और विस्तार के बाद 99 साल के लिए औद्योगिक भूमि का आवंटन किया जा रहा था, हालांकि इससे पहले 99 साल की अवधि पर भूमि आवंटन होना था। नई नीति से साफ है कि निवेशकों को 99 साल तक लीज पर ही भूमि मिलेगी ना कि उन्हें मालिकाना हक मिलेगा।

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इन परिस्थितियों में रद्द होगी लीज

नई औद्योगिक भूमि आवंटन नीति के तहत निवेशकों के लिए कई शर्ते रखी गई हैं। इन शर्तों का उल्लंघन करने पर आवंटित भूमि को रद्द किया जा सकता है।इसमें निवेशक को आवंटित भूमि के दो साल की निर्धारित अवधि के भीतर प्रभावी कदम उठाने होंगे। 3 साल के भीतर उत्पादन में आने के लिए औद्योगिक इकाई की विफलता, लीज समझौते के तहत प्रावधानों का उल्लंघन, 5साल की अवधि की लिए किसी उद्यम का असहयोग। इसके अलावा नीति एक त्रिपक्षीय समझौते के माध्यम से एक सहायक औद्योगिक उद्यम स्थापित करने के लिए एक व्यावसायिक उद्यम के निर्मित क्षेत्र के 60 फीसदी से किराये पर भी प्रावधान रखती है।

स्थायी औद्योगीकरण और रोजगर सृजन होगा
नई औद्योगिक भूमि आवंटन नीति का उद्देश्य स्थायी औद्योगीकरण और रोजगार सृजन के माध्यम से समावेशी विकास प्राप्त करना है। इसमें औद्योगिक उपयोग के लिए भूमि आवंटन को एक निष्पक्ष और पारदर्शी तंत्र विकसित करने का प्रावधान शामिल है।
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