बीमारी को पकड़ने में चूक हुई, एसआईटी के बजाय सीबीआई से जांच करवाएं-सुकेश
सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश सी खजूरिया ने कहा कि बड्डाल मामले में पीड़ितों की बीमारी को पूरी तरह से पकड़ने में चूक हुई है। अगर सरकारमान रही है कि किसी वायरस से नहीं, बल्कि न्यूरोटॉक्सिन मौत का कारण लग रहा है, तो उन्हें बताना चाहिए कि हमने अस्पतालों में पीड़ितों के न्यूरोटॉक्सिन के बेहतर उपचार के लिए क्या व्यवस्थाएं कीं।
जब मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा था तो हमें देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में पीड़ितों को भेजने में प्राथमिकता देनी चाहिए थी, जिससे शायद परिणाम अलग होते। उन्होंने संविधान के अधिनियम 21 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी मौतों पर सरकार की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना होता है, लेकिन इसके लिए सभी उचित उपाय नहीं किए गए। अगर स्वास्थ्य विभाग को मौतों पर कोई आपराधिक एंगल लग रहा है तो एसआईटी के बजाय इसकी सीबीआई जांच करवाई जानी चाहिए, ताकि असलियत को सामने लाया जा सके।
एसएमजीएस अस्पताल में हुई बच्चों की मौत
| 8 दिसंबर |
रुक्सान अहमद (10) |
| 12 दिसंबर |
रफ्तार अहमद (4) |
| 18 दिसंबर |
इश्फाक अहमद (12) की एसएमजीएस से पीजीआई चंडीगढ़ भेजते समय रास्ते में मौत |
| 12 जनवरी |
नवीना कौसर (9), जहूर अहमद (14) |
| 13 जनवरी |
मोहम्मद मारूफ (10) |
| 14 जनवरी |
सफीना कौसर (12) |
| 15 जनवरी |
जबीना कौसर (10) |
क्या कहते हैं रेफरल मानकमुख्य रूप से मरीज को केवल तभी रेफर किया जाता है जब अस्पताल की सेवा व्यवस्था में संबंधित उपकरण/विशेषज्ञ उपलब्ध न हों।
मरीज की गंभीर स्थिति पर विशेषज्ञों की राय के बाद उसे दूसरे बड़े चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जाता है।