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संगीनों के साए में कश्मीर, थमी रहीं सांसे

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हुरिर्यत (म) के वीरवार को ईदगाह चलो आह्वान को प्रशासन ने विफल कर दिया। इसके लिए पुराने शहर में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू की गई थीं। छह थाना क्षेत्रों में धारा 144 लागू किया गया था। ईदगाह जाने वाले रास्ते को पूरी तरह सील कर दिया गया था। जगह-जगह कंटीली तारें लगाई गई थीं। पुराने शहर में पाबंदियों के चलते आम जिंदगी प्रभावित रही।
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वहीं घाटी के अन्य इलाकों में अलगाववादियों द्वारा दी गई बंद की कॉल का असर देखने को मिला। लगभग सभी दुकानें, कारोबारी प्रतिष्ठान और शिक्षण संस्थान बंद रहे। सरकारी दफ्तरों और बैंकों में हाजिरी काफी कम रही। यहां तक कि सड़कों पर यातायात न के बराबर दिखा। मीरवाइज मौलवी उमर फारूक के अलावा लगभग सभी अलगाववादी नेताओं को नजरबंद रखा गया था।

ज्ञात हो कि श्रीनगर में हुर्रियत (म) द्वारा हवल हत्याकांड और मीरवाइज मोहम्मद फारूक के साथ-साथ अब्दुल गनी लोन की बरसी मनाने के लिए वीरवार को ईदगाह चलो का आह्वान किया गया था। श्रीनगर के पुराने शहर में हालातों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया था, ताकि ईदगाह चलो को विफल बनाया जा सके।
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जवान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार थे। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में भी सभी दुकानें, कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे। सड़कों से यातायात भी गायब दिखा। सोपोर के संवेदनशील इलाके में भी जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया था।
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पट्टन में जवानों पर पत्थराव, 5 घायल

कुपवाड़ा, हंदवाड़ा और बांडीपोरा में भी बंद का असर देखने को मिला। इसके अलावा दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा और शोपियां जिले में भी बंद रहा। पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार पुराने शहर के छह थाना क्षेत्रों खान्यार, रैनावारी, नौहट्टा, एमआर गंज, सफकदल और माईसुमा के अंतर्गत आने वाले संवेदनशील इलाकों में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए पाबंदियां लगाई गई थीं।

उन्होंने बताया कि पुराने शहर के इन इलाकों में एहतियातन धारा 144 लागू किया गया था। गौरतलब है कि हर वर्ष हुर्रियत द्वारा 21 मई को बरसी के अवसर पर कार्यक्रम ईदगाह में आयोजित किए जाते थे, लेकिन वर्ष 2010 में घाटी में बने हिंसक हालातों के बाद से प्रशासन द्वारा इसे विफल बनाने के लिए पाबंदियां लगाई जाती हैं।

हुर्रियत (म) अध्यक्ष मीरवाइज मोलवी उमर फारूक के पिता मोलवी मोहम्मद फारूक को अज्ञात बंदूकबरदारों ने 1990 में इसी दिन उनके घर में घुसकर मारा था, जबकि अब्दुल गनी लोन वर्ष 2002 में ईदगाह में मौलवी मोहम्मद फारूक की बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बंदूकबरदारों की गोलियों का शिकार बने थे।

पट्टन के पलहालन इलाके में बड़ी संख्या में युवा सड़क पर उतर आए और पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ जवानों पर पत्थरबाजी की। जानकारी के अनुसार इस दौरान करीब पांच पुलिसकर्मी घायल हुए।
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