एक-दूसरे को फूटी कौड़ी नहीं सुहाने वाले अलगाववादी गुटों में एका की कोशिशें अंजाम तक पहुंचने लगी हैं। कुछ और अलगाववादी गुट भी इस मुहिम में शामिल में होने वाले हैं।
एक-दूसरे को फूटी कौड़ी नहीं सुहाने वाले अलगाववादी गुटों में एका की कोशिशें अंजाम तक पहुंचने लगी हैं। शब्बीर शाह समेत अलगाववादियों के तीन प्रमुख नेताओं के सैयद अली शाह गिलानी का नेतृत्व कबूलने के बाद कुछ और अलगाववादी गुट भी इस मुहिम में शामिल में होने वाले हैं।
दरअसल, भारत सरकार के कड़े रुख के बाद अलगाववादी गुटों को उनकी दुकानदारी खत्म होती दिख रही है। नतीजतन अलगाववादी नेताओं ने एकजुटता की पाकिस्तान की नसीहत को मंजूर कर लिया है।
गिलानी के गोपनीय पत्र के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अलगाववादियों को एक मंच पर आने की सलाह दी है। सूत्रों के मुताबिक गिलानी के पत्र पर नवाज ने अपने सलाहकारों से विचार विमर्श के बाद संदेश हुर्रियत नेताओं तक पहुंचा दिया है।
अब तक कश्मीर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण पर पाकिस्तान और अलगाववादियों को विश्व समुदाय से तरजीह नहीं मिली है। पाकिस्तान मानता है कि अलगाववादियों में बिखराव इसका मुख्य कारण है।
तीन अलगाववादी गुट एक मंच पर
पाक की नसीहत के बाद तीन अलगाववादी गुट एक मंच पर आ गए हैं। अब उदारवादी माने जाने वाले मीरवाइज उमर फारूख को मनाने की कोशिशें चल रही हैं।
डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के चेयरमैन शब्बीर शाह, नेशनल फ्रंट के नईम खान और अंजुमन -ए- शार-ए -शीयन के चीफ आगा सैयद हसन के एक मंच पर आने से घाटी के सियासी समीकरणों में भी बदलाव आ सकता है।
इससे पहले सुरक्षा बलों की हिंसा के खिलाफ जेकेएलएफ चीफ यासीन मलिक और मीरवाइज ने भी गिलानी के साथ श्रीनगर में मंच साझा किया है। पाकिस्तान चाहता है कि अलगाववादियों के सभी गुट एक मंच पर आकर जनमत संग्रह पर जोर दें।
अलगाववादियों से राजनीतिक पार्टियों ने दूरी बनाई
इस बीच जमात-ए-इस्लामी ने इन कोशिशों को झटका देते हुए अलग राह पकड़ ली है। जमात-ए-इस्लामी को पीडीपी के करीब माना जाता है।
जमात-ए-इस्लामी के चीफ गुलाम मोहम्मद भट ने साफ किया है कि उनका संगठन आतंकवाद और किसी भी प्रकार की भूमिगत गतिविधियों के खिलाफ है।
नए समीकरणों के बाद मुख्यधारा के दल नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी भी अलगाववादियों के मुद्दे पर स्टैंड बदल रहे हैं। भाजपा और पीडीपी के गठबंधन एजेंडे में अलगाववादियों से बातचीत का मुद्दा शामिल है। लिहाजा पीडीपी फिर से इस मुद्दे पर जोर देने के मूड में है और नेकां नेता उमर अब्दुल्ला के सुर भी नरम हैं।