पुंछ/राजोरी। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह अंतरराष्ट्रीय सीमा का दौरा करने के बाद मंगलवार को राजोरी और पुंछ में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के साथ सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने के बाद इन्हें और पुख्ता करने के निर्देश दिए।
पुंछ में अधिकारियों के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में डीजीपी ने कहा कि कश्मीर में हाल के दिनों में भर्ती होने वाले आतंकियों में अब सिर्फ 24 सक्रिय हैं। इनका भी शीघ्र ही सफाया कर दिया जाएगा। सबसे अच्छी बात है कश्मीर में नए युवाओं के आतंकी संगठनों में शामिल होने की संख्या काफी कम हुई है। कहा कि पुंछ जिले में सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत है। वो चाहे बॉर्डर पर हो या अंदर, हालांकि नियंत्रण रेखा के उस पार से पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ कराने की लगातार कोशिश कर रहा है। हमने उसकी हर कोशिश को नाकाम किया है और आगे भी करते रहेंगे। डीजीपी ने कहा कि इससे पहले डोडा को सोमवार को आतंकवाद से मुक्त कर दिया गया। वहां के आखिरी कमांडर को मार गिराया गया।
-इस साल अब तक 144 आतंकी मारे
जहां तक कश्मीर की बात है तो इस वर्ष 144 और इस माह अब तक 44 आतंकियों को मार गिराया गया है। इसमें सबसे अधिक हिजबुल मुजाहिदीन के 70 आतंकियों को मारा गया है। जबकि जैश के 30, लश्कर के 30 और कुछ अन्य संगठनों के हैं। डीजीपी ने दावा किया अनंतनाग में 26 जून को सीआरपीएफ जवान और चार साल के मासूम की हत्या में शामिल जेकेआईएस आतंकी जाहिद दास मंगलवार को सुंरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।
सैकड़ों कश्मीरी युवकों की हत्या के बाद गिलानी आज अकेला
डीजीपी ने राजोरी में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने खिन्न होकर हुर्रियत से किनारा किया है। गिलानी ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्हें कश्मीर के हालात पर पछतावा है। कई दशक से सैकड़ों कश्मीरी युवकों की हत्या के बाद गिलानी आज अकेला है। इसलिए उसने अपने आपको कट्टरपंथी हुर्रियत से अलग कर दिया है। डीजीपी ने कहा कि इससे पाकिस्तानी आतंकियों को झटका लगेगा और उन्हें उम्मीद है कि कश्मीर में आतंकवाद की राह पर चलने वाले युवक पीछे हटेंगे।
बसंतर दरिया से सटे क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था जांची
सांबा। डीजीपी दिलबाग सिंह, आईजी बीएसएफ एनएस जमवाल व अन्य अधिकारियों ने बसंतर दरिया से सटे सीमावर्ती क्षेत्र नर्सरी पोस्ट, मल्लू चक आदि की सुरक्षा व्यवस्था जांची। ये वे क्षेत्र हैं जहां बसंतर दरिया में बाढ़ आने से काफी नुकसान होता है।
डीजीपी और अन्य अधिकारियों ने बसंतर नदी में मानसून के सीजन में बाढ़ के मद्देनजर सुरक्षा के काम की निगरानी की और किसानों को नदी के तल में कम ऊंचाई की फसलों की बिजाई के लिए प्रेरित किया, ताकि भूमि बर्बाद न हो। उन्होंने सीमा सुरक्षा बलों, नागरिक एजेंसियों और पुलिस के साथ समन्वय के लिए भी जोर दिया ताकि नागरिकों की समस्या और चिंता का समाधान किया जा सके।
ड्रोन गिराने वाल बीएसएफ जवान सम्मानित
आईजी बीएसएफ एनएस जमवाल ने डीजीपी को बसंतर नदी के क्षेत्र में बीएसएफ के प्रभुत्व के बारे में भी जानकारी दी। डीजीपी ने पिछले दिनों पाकिस्तानी ड्रोन मार गिराने वाली बीएसएफ टीम को भी पुरस्कृत किया। आईजी बीएसएफ ने बाढ़ से पहले किसानों को हर मदद का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर संजीव वर्मा संभागीय आयुक्त जम्मू, मुकेश सिंह आईजीपी जम्मू, रोहित खजूरिया उपायुक्त सांबा, रविंदर शर्मा व अन्य नागरिक एजेंसियों के प्रतिनिधि और बीएसएफ अधिकारी भी थे।
किसानों को सुरक्षा बांध की मरम्मत की आस
बसंतर दरिया में चार वर्ष पहले बारिश से आई बाढ़ से बसंतर दरिया पर बनाए गए बांध का कुछ हिस्सा बह गया था। सीमा पर लगाई गई तारबंदी को भी नुकसान पहुंचा था। बीएसएफ की अग्रिम चौकियां पानी में डूूब गई थीं। किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि बंजर हो गई थी। अब एक बार फिर से किसान चिंतित हैं कि यदि बारिश अधिक होती है तो बसंतर दरिया में बनाए गए सुरक्षा बांध के टूटने से उनकी बची भूमि भी बरबाद न हो जाए। अब उच्च अधिकारियों के दौरे से किसानों को सुरक्षा बांध की मरम्मत की आस जगी है।