श्रीनगर में मुठभेड़ में ढेर लश्कर कमांडर मेहराजदीन बांगरू पहले कुख्यात पत्थरबाज था। वह हुर्रियत के साथ जुड़ा था। बाद में उसने आतंक की राह थाम ली और कम समय में ही लश्कर का कमांडर बन बैठा। सुरक्षा बलों को उसकी लंबे समय से तलाश थी। वह श्रीनगर में युवाओं को बरगला कर आतंकी संगठन में भर्ती कर रहा था। श्रीनगर को आतंकवाद के नक्शे पर लाने में उसकी बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
बांगरू पुलिस और अन्य सुरक्षाबलों के लिए मोस्ट वांटेड आतंकी था। श्रीनगर शहर में फिर से आतंकी जड़ों को मजबूत करने में पुलिस मानती है कि मेहराज का बड़ा हाथ था। युवाओं को आतंकी संगठनों में शामिल करना, श्रीनगर में आतंकियों के हाइडआउट बनाना, सभी आतंकी संगठनों के बीच तालमेल बनाना यह सब काम उसे दिया गया था। फतेहकदल के नर्परिस्तान का मेहराजदीन बांगरु उर्फ पीर उर्फ गुरु उर्फ आसिफ कभी हिजबुल मुजाहिदीन का नामी आतंकी था। 2002 में गिरफ्तार किए जाने के बाद वह काफी देर तक जेल में बंद रहा।
रिहा होने के कुछ सालों तक उसने आतंकवाद से कोई नाता नहीं रखा। लेकिन वह हुर्रियत कांफ्रेंस से जुड़ा रहा। 2002 से 2012 तक वह कई बार जेल जाता रहा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उसने फिर श्रीनगर में आतंकी गतिविधियों में बतौर ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) हिस्सा लेना शुरू किया। उसने तहरीक-उल-मुजाहिदीन का नेटवर्क श्रीनगर में बनाना शुरू किया। डाउनटाउन के नौहट्टा व उसके साथ सटे इलाकों में उसने स्थानीय युवकों का एक दल भी तैयार किया जो आईएसआईएस की विचारधारा से प्रभावित था।
वर्ष 2015 में बांगरू श्रीनगर से अचानक गायब हो गया और तहरीक-उल मुजाहिदीन का सक्रिय कमांडर बन गया। उसके साथ ही उसने श्रीनगर और उसके साथ सटे इलाकों में युवाओं की भर्ती शुरू करते हुए दक्षिण व सेंट्रल कश्मीर में सक्रिय पुराने आतंकियों के साथ संपर्क भी बनाया। वह हिजबुल और लश्कर के आतंकियों के बीच कोआर्डिनेटर की भूमिका निभाने लगा। खुफिया विभाग के सूत्रों के मुताबिक उसने ही दाऊद सलफी, इसा फजली, मुगीस, फैजान, सज्जाद गिलकार समेत कई युवकों को आतंकी संगठनों में शामिल कराया था। इनमें से कई लड़कों ने आईएसआईएस और जाकिर मूसा का गुट भी चुना। तहरीक-उल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर जमील उर रहमान के साथ मतभेद के चलते बीते साल वह लश्कर में शामिल हो गया था।