15 साल से बंद पड़ा है अरनिया ब्लॉक के तहत आता गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल कूल कलां
सरकारी अध्यापिका ने 10 दिन पहले खेलने पर लगाई रोक
अरनिया। युवाओं को बंद पड़े सरकारी स्कूल के मैदान में अखाड़ा तैयार करना भारी पड़ गया। 10 दिन पहले एक सरकारी अध्यापिका ने बंद पड़े स्कूल में पहुंचकर युवाओं को फटकार लगाई और अखाड़े के सामान को बाहर फेंकवाने के बाद यहां खेलने पर रोक लगा दी।
युवाओं का कहना है कि 10 दिन मेहनत करने के बाद 15 साल से बंद पड़े गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल कूल कलां परिसर की साफ सफाई कर अखाड़ा तैयार किया है। गांव के युवा भी अखाड़े में जोर आजमाइश करने के लिए पहुंच रहे थे। मगर 10 दिन पहले एक सरकारी अध्यापिका ने स्कूल खेल में गतिविधियां करने पर रोक लगा दी। उसके साथ ही फटकार भी लगाई है।
अध्यापिका ने चेतावनी दी है कि अगर वह यहां पर खेलते दिखे तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कारण पिछले 10 दिन से युवाओं ने अखाड़े में जोर आजमाइश करना बंद कर दिया है। सरकारी अध्यापिका ने अखाड़े का सामान भी स्कूल के बाहर कर दिया है।
युवाओं का कहना है बंद पड़े स्कूल की साफ सफाई में सभी युवाओं ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया था।उन्होंने कहा कि बंद पड़ा सरकारी स्कूल नशे का अड्डा बन गया था। शरारती तत्व बंद पड़े स्कूल में नशे की आपूर्ति करते थे। उन्होंने बताया कि सफाई के दौरान शराब की बोतलें और सिरिंज मिली हैं।चूंकि क्षेत्र में एक भी खेल का मैदान नहीं है। इसलिए 15 साल से बंद पड़े सरकारी स्कूल के परिसर को अखाड़ा बनाया था। इसमें सभी युवाओं ने पैसे एकत्रित कर अखाड़े का सामान खरीदा था, जिस पर उन्होंने 20000 रुपये खर्च किए हैं।
युवाओं का कहना है कि एक तरफ सरकार युवाओं को खेलकूद में भविष्य बनाने के लिए अग्रसर कर रही है और दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर खेलकूद के लिए मना किया जा रहा है। बंद पड़े स्कूल में शिक्षा विभाग को अखाड़े को सुचारु करने की आज्ञा दी जानी चाहिए। ताकि क्षेत्र के युवा खेलकूद के जरिए आगे बढ़ सकें। इस मौके पर रजत सालरिया, राहुल कुमार, गौरव शर्मा, कुलविंदर सिंह सैनी, सौरभ कुमार, करन देव, सागर सलाथिया मौजूद रहे।
बंद पड़े स्कूल में खेलकूद करने की कोई मनाही नहीं है। लिहाजा युवाओं की ओर से स्कूल में किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जानी चाहिए। इस मुद्दे पर स्वयं संज्ञान लूंगा।
सुभाष चंद्र, जोनल शिक्षा अधिकारी अरनिया