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गजबः झोपड़ी में स्कूल सड़क पर पढ़ाई

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केंद्र और रियासती सरकार सरकारी स्कूलों में आधारभूत ढांचा मजबूत करने और पेयजल और शौचालय सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए यहां बड़े बड़े दावे और घोषणाएं आए दिन कर रही हैं, वहीं जमीनी हकीकत इससे एकदम विपरीत है।
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ग्रामीण इलाकों में तो सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी हैं ही, शहरी इलाकों में भी हालात कुछ ज्यादा अच्छे नहीं हैं। जम्मू पूर्व विधानसभा क्षेत्र में लोअर धोंथली में सरकारी प्राइमरी स्कूल पिछले कई साल से झुग्गी में चल रहा है।

स्कूल के बच्चों को न तो पेयजल की सुविधा है और न ही शौचालय की। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने मौके पर जाकर पाया कि स्कूली बच्चों को गली में पढ़ाया जा रहा है।
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हर मौसम में खुले आसमान के नीचे ही रहते हैं बच्चे

सड़क पर ही नौनिहालों को जो शिक्षा दी जा रही है उसके स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्कूल में गिनती के बच्चे आते हैं जिन्हें दो शिक्षिकाएं घेरे रहते हैं। राह चलते लोग इन्हीं बच्‍चों के बीच से होकर गुजरते हैं। सर्दी-गर्मी हो या बरसात बच्चों को ऐसे ही खुले आसमान में पढ़ाया जाता है।

यह केवल आंखें खोलने के एक उदाहरण भर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार रियासत में करीब 14453 सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 3202 प्राइमरी स्कूलों में अपनी इमारत तक नहीं है, 948 प्राइमरी स्कूलों की इमारतें खस्ताहाल स्थिति में हैं।

इससे खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी स्कूलों में आज भी किस तरीके की पढ़ाई हो रही है। वहीं इस बारे में मुख्य शिक्षा अधिकारी जम्मू तरसेम लाल का कहना है स्कूल के लिए इमारत बनने के बाद झुग्गी में चल रहे स्कूल को शिफ्ट कर दिया जाएगा।
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