प्रदेश और केंद्र सरकार के आगामी बजट पर बेरोजगार युवाओं ने अमर उजाला संवाद में रखी राय, दिए सुझाव
प्रदेश में हो एक कौशल विकास यूनिवर्सिटी, नौकरी के लिए आवेदन शुल्क समाप्त किया जाए
जम्मू। प्रदेश एवं केंद्र सरकार के आगामी बजट को लेकर शुक्रवार को अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। बेरोजगारी से जूझ रहे प्रदेश के अनेक युवाओं ने इसमें भाग लेते हुए अपनी पीड़ा और सुझाव सामने रखे। संवाद में युवाओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में रोजगार की स्थिति चुनौतीपूर्ण है और इसे सुधारने के लिए अब घोषणाओं से अधिक धरातल पर कार्य की आवश्यकता है। युवाओं ने आगामी बजट में आयु सीमा में छूट, कौशल विकास विश्वविद्यालय की स्थापना, विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती और नौकरी के आवेदन शुल्क को समाप्त करने जैसी मांगें रखीं।
युवाओं का कहना है कि प्रदेश में स्थायी रोजगार के अवसर सीमित हैं और अधिकांश युवा आज भी सरकारी नौकरियों को ही स्थिरता का साधन मानते हैं। परंतु पद कम होने और भर्तियों में विलंब के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे। युवाओं ने सुझाव दिया कि सरकार निजी क्षेत्र को बढ़ावा देकर रोजगार के नए स्रोत विकसित करे, ताकि सरकारी नौकरियों पर निर्भरता कम हो।
संवाद में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि अनुच्छेद 370 और कोरोना काल के वर्षों में सरकारी भर्तियां ठप रहीं। इस अवधि में अनेक उम्मीदवार आयु सीमा पार कर गए। युवाओं ने कहा कि आयु सीमा में छूट दी जाए जिससे वे भी पुनः प्रतियोगी प्रक्रिया में शामिल हो सकें और आने वाली युवा पीढ़ी को भी इसका लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि देश के अन्य राज्यों में आयु सीमा अधिक जबकि प्रदेश में कम है।
कौशल विकास पर भी गंभीर चर्चा हुई। युवाओं का कहना था कि नई कंपनियों को प्रदेश में लाने के लिए स्थानीय युवाओं को उपयुक्त प्रशिक्षण और कौशल प्रदान करना अनिवार्य है। इससे न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि स्वरोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे। युवाओं ने मांग की कि कौशल विकास ढांचे को मजबूत किया जाए और इसे ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए।
शिक्षा और सूचना-संप्रेषण सुविधाओं की कमी पर भी युवाओं ने ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना था कि शहरों तक सुविधाएं सीमित हैं, जबकि दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट एवं सूचना पहुंच का अभाव है। यदि प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती सूचनाओं और प्रशिक्षण से जुड़े संसाधन समान रूप से उपलब्ध हों तो अनेक युवाओं को अवसर मिल सकेगा।
इसके अलावा आरबीए में कोटा कम करने पर भी युवाओं ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि यह कोटा पहले 27 प्रतिशत होता था, जिसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है और सरकार इसे और घटाने की फिराक में है। ऐसा करने से बेरोजगारी बढ़ेगी।
संवाद में सरकार के पुराने वादे भी सवालों के घेरे में आए। युवाओं ने कहा कि सत्ता संभालते समय लाखों नौकरियां निकालने का दावा किया गया था, परंतु वह अभी तक कागजों से बाहर नहीं आया। सरकारी नौकरियों के आवेदन शुल्क समाप्त करने की घोषणा भी अधूरी बताई गई। युवाओं ने तंज कसा कि जब आय का साधन नहीं है तो हर भर्ती के लिए शुल्क भरना भारी पड़ता है, इसलिए आवेदन प्रक्रिया निशुल्क की जानी चाहिए।
निजी क्षेत्र में अत्यंत कम वेतन मिलने की समस्या भी उठाई गई। युवाओं ने कहा कि सरकार को इस क्षेत्र पर भी नियंत्रण और निगरानी स्थापित करनी चाहिए, ताकि शिक्षित युवाओं को उचित वेतन मिल सके। संवाद में यह भी कहा गया कि विभागों में स्थायी पद खाली रहते हैं और काम दैनिक वेतनभोगी कर्मियों से लिया जाता है। इससे युवाओं का भविष्य अनिश्चित बना रहता है। इस पर मांग की गई कि रिक्त स्थायी पदों को शीघ्र भरा जाए। समय-समय पर प्रदेश में बेरोजगारी का डेटा लिया जाए और इसकी गंभीरता समझते हुए बेरोजगारी कम करने के लिए आगामी बजट में ठोस प्रावधान किए जाएं।
संवाद में विंकल शर्मा, सुरेखा रानी, सोनाली, प्रदीप, अमन, धीरज ठाकुर, प्रियतोश देव, डॉ. बिहारीलाल भूषण, तारिक महमूद, अमीर चौधरी, तनवीर व सुधांशु उपस्थित रहे।