गांव में देर सबेर कोई बीमार पड़ जाता है, तो जान पर बन आती है। चिकित्सा सेवा के लिए भी आठ किलोमीटर पैदल चलने की मजबूरी है। इससे कई लोगों की जान तक चली गई। मजबूरी में ज्यादातर परिवाराें को गांव से शहर की ओर आना पड़ा। -मोहन लाल, स्थानीय निवासी।
पलायन का मुख्य कारण पूर्ण रूप से शिक्षा मुहैया न होना है। बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए 20 किलोमीटर तक कॉलेज जैसी सुविधा पाने के लिए स्कूल जाने के लिए सुबह जल्दी उठना पड़ता है। 8 किलोमीटर पैदल चलने के बाद बस तक पहुंचा जाता है, और फिर सांबा के लिए 30 किलोमीटर और मंडल के लिए 12 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। -साहिल कुमार, गांव निवासी युवक।
लोग गांव में रोजगार नहीं मिलने से शहरों की तरफ जाने को मजबूर हैं। लोगों का अधिकतर समय पैदल सफर करने में ही निकल जाता है। दिहाड़ी मजदूरी करना मुश्किल हो जाता है। -जसपाल, स्थानीय निवासी।
असल में इस इलाके की सुध ही नहीं ली गई। मूलभूत सुविधाएं हर ग्रामीण क्षेत्र को मिलनी चाहिए, गांव रजुल में सड़क बनाने के लिए नाबार्ड को प्रस्ताव भेजा गया है और बोर्ड की मीटिंग होने के बाद हमें पूरा यकीन है कि इसी साल गांव में सड़क का काम लगा दिया जाएगा। जब से डीडीसी पुरमंडल के नुमाइंदे चुने गए हैं, ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता देना ड्यूटी है, जिसके लिए दिन रात मेहनत की जा रही है। -अवतार सिंह, डीडीसी सदस्य, पुरमंडल।