एमएलसी चुनाव में पीडीपी खेमे के माने जा रहे एक निर्दलीय विधायक के भाजपा उम्मीदवार को वोट देने से राज्य में गठबंधन सरकार में सहयोगी दलों पीडीपी और भाजपा में दरार का खतरा बढ़ गया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार विधानसभा में 29 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी पीडीपी को झंस्कार के अपने खेमे के निर्दलीय विधायक बाकिर रिजवी के वोट से दो सीटों पर हुए मतदान में तीस मतों के साथ एक सीट पर जीत सुनिश्चित थी, लेकिन रिजवी ने पीडीपी को वोट न देकर भाजपा का साथ दिया। इससे पीडीपी और भाजपा के वोट 29-29 हो गए। इसके बाद पर्ची सिस्टम में भाजपा उम्मीदवार विक्रम रंधावा जीत गए।
कुल मिलाकर छह विधान परिषद की सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा विधानसभा में 26 विधायकों के साथ दूसरे नंबर की पार्टी होने के बाद सबसे ज्यादा तीन सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि पीडीपी 29 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद केवल एक सीट ही जीत पाई। एक-एक सीट नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के खाते में गई।