कश्मीर घाटी में कौसर नाग यात्रा को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने अलगाववादियों और अन्य संगठनों के दबाव तले आकर यात्रा को स्थगित कर दिया है।
ऑल पार्टी मिग्रेंट्स कोर्डिनेशन कमेटी ने सरकार के इस फैसले की निंदा की है। अलगाववादियों ने भी इसके खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है।
पीर पंजाल में है कौसर नाग
कौसर नाग कश्मीर घाटी में पीर पंजाल पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। इसे कौसर नाग झील के रूप में भी जाना जाता है और यह समुद्र की सतह से 12,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। कश्मीर में इसे विशुद्ध पानी का एक प्रमुख स्रोत माना जाता है।
इस बार की कौसर नाग यात्रा आज कुलगाम जिले के अहर्बल से आरम्भ होनी थी लेकिन, राज्य सरकार ने यात्रा के लिए ऑल पार्टी मिग्रेंट्स कोर्डिनेशन कमेटी (एपीएमसीसी) को जो अनुमति दी थी वह अचानक से रद कर दी है।
राज्य सरकार के इस आदेश से एपीएमसीसी के अलावा कश्मीरी पंडित भी भड़क गए हैं।
विदेशी सैलानियों से प्रदूषण नहीं होता?
सरकार के इस फैसले की निंदा करते हुए एपीएमसीसी के अध्यक्ष विनोद पंडिता ने कहा, संस्था पिछले 25 सालों से राज्य में काम कर रही है और ऐसा व्यवहार कभी भी नहीं देखा गया।
सरकार के इस व्यवहार से लगता है कि सरकार ने यह फैसला किसी दबाव में आकर लिया है क्योंकि जिला प्रशासन ने पहले इस यात्रा को आयोजित करने की अनुमति दी थी।
पंडिता ने कहा कि अलगाववादियों द्वारा आरोप लगाए गए थे कि यात्रा पर 4000 श्रद्धालु जा रहे हैं जिससे पर्यावरण प्रदूषित होगा लेकिन यात्रा पर केवल 40 लोग जा रहे थे।
पंडिता ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि जब हालही में कौसर नाग यात्रा के लिए निरीक्षण करने गए तब वहां काफी संख्या में विदेशी सैलानी मौजूद थे। क्या उनके वहां जाने से प्रदूषण नहीं होता?
'रियासी नहीं अहर्बल-कुलगाम है असली रास्ता'
पंडिता ने पवित्र अमरनाथ यात्रा पर भी सवालिया निशान खड़ा करते हुए कहा कि वहां भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु जाते हैं तो क्या वहां प्रदूषण नहीं होता? उन्होंने सरकार द्वारा रियासी-जम्मू को इस यात्रा का पारंपरिक रास्ता बताने को लेकर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि इस यात्रा का पारम्परिक रास्ता अहर्बल-कुलगाम से ही है और आतंकवाद का दौर शुरू होने से पूर्व भी यह यात्रा कुलगाम से ही जाती रही है।
शुरू से ही यात्रा को लेकर विरोध हो रहा है, पहले अलगाववादियों ने इसका विरोध किया था वहीं सेव कौसर नाग फ्रंट नामी संगठन भी इसका विरोध कर रहा है।
जुमे की नमाज के बाद हो सकता है बवाल
पिछले कईं दिनों से कुलगाम में यात्रा का विरोध हो रहा है और आज भी कुलगाम जिले के अहर्बल में यात्रा के विरोध में प्रदर्शन हुए और स्थिति को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग किया गया। विरोध अब सियासी रंग लेता जा रहा है।
नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता जुनैद अज़ीम मट्टू के अनुसार सरकार जो भी फैसला लेगी वो लोगों के हित में होगा और वह चाहते हैं कि घाटी में हिन्दू मुस्लिम भाईचारा कायम रहे।
वहीं, कांग्रेस फैसले को दबाव में लिया गया फैसला बता रही है। अलगाववादियों ने नाग यात्रा के विरोध में शुक्रवार को जुम्मा की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन करने और शनिवार को कश्मीर बंद का आवाहन किया है।