सरकार ने कहा है कि भूमिहीन किसान अथवा इकलौता मकान बनाकर रह रहे वर्ग से फीस लेकर एक निर्धारित सीमा तक भूमि पर कब्जे के अधिकार दिए जा सकते हैं। इस सीमा से बाहर या सरकारी जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों को कोई राहत न दी जाए। कोर्ट यदि अनुमति देती है तो सरकार इस तरह की व्यवस्था बना सकती है।
सीबीआई बड़ी मछलियों के केसों की ही करे जांच
पुनर्विचार याचिका में सरकार ने कहा है कि रोशनी घोटाले में बड़ी मछलियों के मामलों को ही सीबीआई जांच के लिए देना चाहिए। एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच कई मामलों में बहुत आगे तक पहुंच चुकी है। यदि सीबीआई इन मामलों को नए सिरे से जांचती है तो इसमें बहुत देरी होगी। ऐसे मामले सीबीआई को न देकर एसीबी को निर्धारित समय में जांच पूरी करने के आदेश दिए जा सकते हैं।
रोशनी एक्ट में दी गई कुल सरकारी जमीन - 6,04,602 कनाल (75575 एकड़)
जम्मू संभाग - 5,71,210 कनाल
कश्मीर संभाग - 33,392 कनाल
वर्ष 2001 में बनाए गए रोशनी एक्ट को तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 28 नवंबर 2018 को रोशनी योजना को निरस्त कर दिया था। वहीं हाईकोर्ट ने 9 अक्तूबर 2020 को इस योजना को असांविधानिक करार देकर पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने एक नवंबर को ढाई लाख एकड़ जमीन के उन मामलों को खारिज कर दिया, जिन्हें मालिकाना हक दिए जाने थे।