सौदा पक्का होते ही लड़कियों को भेजा जाता है आगे
पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज मामले रोहिंग्या लड़कियों की तस्करी के सबूत हैं। सूत्रों के मुताबिक, जम्मू और श्रीनगर में यह सिलसिला जारी है। जम्मू की रोहिंग्या बस्तियां इनके लिए ट्रांजिट पॉइंट का काम करती हैं। कुछ दिन यहां रखने के बाद सौदा पक्का होते ही लड़कियों को आगे भेज दिया जाता है।
इस तस्करी में कश्मीर के कुछ लोग भी शामिल हैं, जो रोहिंग्या समुदाय के साथ मिलकर यह गतिविधि चला रहे हैं। अब तक जम्मू संभाग में 30 और कश्मीर में 110 लड़कियों की जबरन शादियां कराई जा चुकी हैं। प्रदेश की पुलिस को इसकी जानकारी है।
जम्मू के दक्षिणी इलाकों में सबसे अधिक मौजूदगी
जम्मू के बठिंडी, सुंजवां, त्रिकुटा नगर और नरवाल जैसे इलाकों में रोहिंग्याओं की बस्तियां हैं। जम्मू जिले के 70% रोहिंग्या इन्हीं क्षेत्रों में रहते हैं। ये इलाके उनके लिए ट्रांजिट जोन की तरह काम करते हैं, जहां लड़कियों या अन्य लोगों को कुछ दिन रोककर फिर अन्य राज्यों में भेज दिया जाता है।
तस्करी का तरीका
म्यांमार की रोहिंग्या बस्तियों में एनजीओ की आड़ लेकर तस्कर लड़कियों को चुनते हैं। कोलकाता या गुवाहाटी में नौकरी का झांसा देकर उन्हें भारत लाया जाता है। जम्मू पहुंचने पर इन्हें बस्तियों में छिपाया जाता है। पहचान छिपाने के लिए फर्ज़ी आधार कार्ड बनवाए जाते हैं।
दिसंबर 2023 में जम्मू में 61 और कश्मीर में 97 नकली आधार कार्ड बरामद हुए, जिनमें अधिकांश महिलाओं के थे। पूर्व डीजीपी एसपी वैद के अनुसार स्थानीय लोगों के साथ रोहिंग्या लड़कियों की शादियां लंबे समय से चल रही हैं।
रोहिंग्याओं की अधिकतर घुसपैठ पश्चिम बंगाल से होती है। वहां से ट्रेन या अन्य साधनों से ये जम्मू पहुंचते हैं। इन्हें पश्चिम बंगाल में ही रोकना जरूरी है। हालांकि, पुलिस इन पर नजर रखे हुए है। कई मामले दर्ज भी किए गए हैं। बस्तियों में रहने वालों की हर गतिविधि पर निगरानी है।
अजय शर्मा, एसपी, जम्मू दक्षिण