इकजुट जम्मू के अध्यक्ष एडवोकेट अंकुर शर्मा का कहना है कि पूर्व की सरकारों ने जम्मू की जनसांख्यिकी बदलने के लिए इनको अवैध रूप से जम्मू में बसाया है। राज्य की पिछली सरकारों के समर्थन से ही रोहिंग्याओं की संख्या बढ़ती गई। 370 अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा था और इसी की आड़ में सरकारें रोहिंग्याओं को बढ़ावा देती रही हैं। लेकिन जब 370 को हटा दिया गया तो अब मौका है कि सरकार रोहिंग्याओं को जम्मू से बाहर करें और जनसांख्यिकी बदलाव की साजिश को नाकाम करें।
तीन साल में जम्मू के अलग-अलग थानों में नशाखोरी और जबरन शादियां कराने जैसे मामलों में रोहिंग्याओं पर आधा दर्जन से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं। रोहिंग्या होने के बावजूद इन लोगों के पास जम्मू के राशन कार्ड, आधार कार्ड और यहां तक कि खुद के नंबर के मोबाइल नंबर तक हैं। शहर के छन्नी, बठिंडी, सुंजवां इलाके में ये मुख्य रूप से रहते हैं। इसके अलावा अन्य जगहों पर भी ये रह रहे हैं।