फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीरः अनुच्छेद 370 के बाद अगला टारगेट रोहिंग्या, केंद्र सरकार ले सकती है बड़ा निर्णय

Mon, 02 Sep 2019 11:52 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
विज्ञापन

अलगाववाद और आतंकवाद पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार ने पहले जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया और अब प्रदेश से रोहिंग्याओं को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों की मानें तो इस संबंध में केंद्र सरकार का जल्द ही बड़ा फैसला आ सकता है। केंद्र जम्मू कश्मीर के गृह विभाग से इनकी जानकारी जुटा रहा है।

विज्ञापन


कई ऐसे संगठन हैं, जो रोहिंग्याओं को जम्मू के लिए खतरा बताते रहे हैं और खुलकर इनको बाहर निकालने की मांग कर चुके हैं। इनमें इजकुट जम्मू और चैंबर ऑफ कामर्स जम्मू मुख्य रूप से शामिल हैं। मौजूदा समय में सिर्फ जम्मू में ही 10 हजार से अधिक रोहिंग्या हैं।

यह भी पढ़ेंः कश्मीरः डाउनटाउन जहां पुरुष से लेकर महिलाएं सुरक्षा बलों पर करती थीं पत्थरबाजी...आज कुछ ऐसा है माहौल


इसके अलावा राज्य के अन्य इलाकों की बात करें तो इनकी संख्या 50 हजार के आसपास है। केंद्रीय गृह मंत्रालय राज्य के गृह विभाग और खुफिया एजेंसियों से लगातार संपर्क में है। बताया जा रहा है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही गृह मंत्रालय की ओर से रोहिंग्याओं की जानकारी लेने का काम शुरू कर दिया गया था। इनको जम्मू कश्मीर से बाहर करने पर काम चल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

370 अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा था- एडवोकेट अंकुर

इकजुट जम्मू के अध्यक्ष एडवोकेट अंकुर शर्मा का कहना है कि पूर्व की सरकारों ने जम्मू की जनसांख्यिकी बदलने के लिए इनको अवैध रूप से जम्मू में बसाया है। राज्य की पिछली सरकारों के समर्थन से ही रोहिंग्याओं की संख्या बढ़ती गई। 370 अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा था और इसी की आड़ में सरकारें रोहिंग्याओं को बढ़ावा देती रही हैं। लेकिन जब 370 को हटा दिया गया तो अब मौका है कि सरकार रोहिंग्याओं को जम्मू से बाहर करें और जनसांख्यिकी बदलाव की साजिश को नाकाम करें।
 
तीन साल में जम्मू के अलग-अलग थानों में नशाखोरी और जबरन शादियां कराने जैसे मामलों में रोहिंग्याओं पर आधा दर्जन से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं। रोहिंग्या होने के बावजूद इन लोगों के पास जम्मू के राशन कार्ड, आधार कार्ड और यहां तक कि खुद के नंबर के मोबाइल नंबर तक हैं। शहर के छन्नी, बठिंडी, सुंजवां इलाके में ये मुख्य रूप से रहते हैं। इसके अलावा अन्य जगहों पर भी ये रह रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें