सांबा। उपायुक्त अनुराधा गुप्ता ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे में लोगों की आने वाली भूमि का तुरंत मुआवजा दिया जाए। इसके लिए प्रशासन की ओर से लोगों को सार्वजनिक सूचना भी दी गई है।
उन्होंने आम जनता की जानकारी के लिए अधिसूचित किया कि दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे के संरक्षण के तहत भूमि मुआवजे के वितरण के लिए शिविर आयोजित करने के लिए निम्नलिखित तिथियां निर्धारित की गई हैं। किस गांव में कहां व कब मुआवजे की राशि दी जाएगी।
शिविर का स्थान टपियाल गांव के लिए 13 जुलाई को पंचायत घर टपियाल घगवाल, सगाल, सुआंदा और जतवाल गांव के लिए 18 जुलाई से 23 जुलाई तक बीएमएस फार्म जतवाल घगवाल, बीरपुर के लिए समैलपुर के लिए 27 जुलाई को उदय फार्म बीरपुर, मीन चाढ़का के लिए 27 जुलाई को पंचायत घर करथेली, मीन सरकार के लिए एक अगस्त को पंचायत घर कार्थोली, पाटी के लिए 5 अगस्त को पंचायत घर पाटी, तरोर के लिए 9 अगस्त पंचायत घर पाटी, कटली गांव के लिए 16 अगस्त को पंचायत घर दियानी, रेईयां गांव के लिए 20 अगस्त को पंचायत घर रेईयां सांबा, रामनगर के लिए 24 अगस्त पंचायतघर रख अंब टाली, रख अंब टाली गांव के लिए 27 अगस्त को पंचायत घर रख अंब टाली, बढेरी गांव के लिए 31 अगस्त पंचायत घर बढेरी (नया), लंगथ गांव के लिए तीन सितंबर को पंचायत घर बढेरी (नया), बाढा गांव के लिए आठ सितंबर संत मंदिर हॉल बाढा, सुंजमा गांव के जलए 13 सितंबर पंचायत घर सुंजवां, चक मेहताब सिंह गांव के लिए 17 सितंबर को शिव बैंकट हाल चक मेहताब सिंह, विजयपुर के लिए 23 सिंतबंर जिला प्रशिक्षण इंस्टीट्यूट विजयपुर, सलमेरी गांव के लिए 28 सितंबर को पंचायत घर छन्नी मनहासां, पखडी गांव के लिए पंचायत घर छन्नी मनहासां, छजवाल गांव के लिए गुरुद्वारा हाल चक राम चंद में शिविर लगाकर लोगों को मुआवजा राशि वितरित की जाएगी।
उपायुक्त ने सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में पहुंच कर संबधित नंबरदार व चौकीदार की भी सहायता लें। लोगों को मुआवजा राशि बांटें।
घर दुकानें हाईवे में आने पर सुपवाल के लोग चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जिले के सपुवाल कैंप के लोग इन दिनों काफी परेशानी में हैं। दिल्ली-कटारा एक्सप्रेस-वे बनाए जाने पर सुपवाल के लोगों के मकान व दुकानें मार्ग के बीच आ रही हैं। इसको लेकर लोग काफी परेशानी में हैं।
स्थानीय सरपंच प्रवीण चौधरी ने कहा कि वह लोग 1971 के भारत-पाक के युद्ध में विस्थापित हुए थे, कुछ वर्ष विस्थापित शिविरों में रहने के बाद उनका पुनर्वास किया गया। उन्हें रहने के लिए प्लाट उपलब्ध कराए गए। उन्होंने मकान व दुकानें बनाई व अपनी गुजर बसर करनी शुरू की। अब पता चला है कि एक्स्प्रेस-वे के निर्माण का काम शुरू कियर जाना है। ऐसे में उनकी दुकानें व मकान भी मार्ग में आ रहे हैं। वह लोग एक बार फिर से विस्थापित हो जाएंगे। उन्होंने मांग की कि उन्हें रिहायश के लिए प्लाट उपलब्ध कराए जाएं। ताकि उन्हें विस्थापित होने से बचाया जाए।