पुरमंडल। जिले के पाडल गांव में सड़क सुविधा न होने से लोगों को आने जाने में परेशानी हो रही है। उन्हें सात किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचना पड़ता है। बीमार होने पर मरीज को चारपाई से हॉस्टिपटल पहुंचाना पड़ता है।
स्थानीय निवासियों में पूर्व सरपंच पूर्णचंद शर्मा, बलवीर सिंह, आंचल सिंह, नसीब सिंह, प्रकाश सिंह और बोधराज आदि लोगों ने बताया कि देश को आजाद हुए 75 साल हो गए हैं लेकिन पाडल गांव को आज तक पक्की सड़क नहीं मिल पाई है। लगभग 500 के करीब की आबादी वाले गांव में लोगों को सामान लाने के लिए मुख्य सड़क तक पैदल सात किलोमीटर का सफर करना पड़ता है।
इसके अलावा प्राइमरी स्कूल से आगे की पढ़ाई करने वाले गांव के 30 से अधिक बच्चों को रोज 14 किलोमीटर पैदल आना जाना करना पड़ता है। इससे उनकी पढ़ाई पर भी गहरा असर पड़ता है। वे समय पर स्कूल भी नहीं पहुंच पाते हैं। लोगों को रोजी रोटी कमाने के लिए भी कई किलोमीटर का पैदल सफर तय कर पहुंचना पड़ता है। खासकर बरसात के मौसम में यह सफर और भी मुश्किल हो जाता है। बरसात के मौसम में नाले में पानी आने के कारण कई बारबच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल आना जाना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क न होने के कारण गांव के लोगों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए शहरों में किराये के मकान में रहना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि आज प्रधानमंत्री सड़क योजना का चौथा चरण चल रहा है लेकिन आज तक उनके गांव के लिए सड़क नहीं बन पाई। पूर्व सरपंच पूर्ण चंद शर्मा व अन्य लोगों ने बताया कि पाडल गांव के लिए सरकार की ओर से चार करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से एक प्रोजेक्ट बनाकर तैयार किया गया था लेकिन आज तक उसका काम भी शुरू नहीं हो पाया है। लोगों ने सरकार और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मांग की है कि उनके गांव के लिए जल्दी से जल्दी सड़क बनाई जाए ताकि लोगों को आने जाने की सुविधा मिल सके।
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इस सड़क का प्रोजेक्ट बनाकर मंजूरी के लिए भेजा गया है। उम्मीद है के मंजूरी के बाद इसका काम शुरू हो जाएगा। पीएमजीएसवाई के अंतर्गत आज तक सड़क नहीं बनने का कारण वह नहीं बता सकते। इसका जवाब प्रशासन ही दे सकता है।
-आरित गुप्ता, एक्सईएन लोक निर्माण विभाग विजयपुर