युवाओं को आतंक के रास्ते ले जाने और आतंकी साजिशें रचने के लिए कुख्यात नायकू ने घाटी में आतंकियों के जनाजों में गन सैल्यूट का चलन दोबारा शुरू कराया। वह कॉम्बेट ड्रेस पहने आतंकी के जनाजे में पहुंचता और हवाई फायरिंग कर जनाजे में शामिल युवाओं को आतंकी बनने के लिए उकसाता था।
नायकू सबसे पहले जनवरी 2016 में आतंकी शरीक अहमद भट के जनाजे में नजर आया। इसके बाद आतंकी के जनाजों में गन सैल्यूट और नए युवाओं की भर्ती का चलन शुरू हो गया। यही नहीं, नायकू ने वर्ष 2018 में जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों के कई परिवार वालों को अगवा कर लिया। इसके कई वीडियो वायरल हुए। नायकू ने अगवा लोगों को छोड़ने के लिए अपने पिता की पुलिस से रिहाई करवाई। इसके बाद नायकू ने स्थानीय निकाय चुनाव में भाग लेने वालों को भी एसिड हमले की चेतावनी दी।
आईएस की तरह बना निर्मम हत्यारा
घाटी में किसी स्थानीय नागरिक की निर्मम हत्या करने वाले नायकू ने आईएस का तौर तरीका अपनाया। 15 नवंबर 2018 में 18 वर्षीय युवक की अगवा करने के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई। नायकू ने वीडियो वायरल कर हत्या की जिम्मेदारी ली और मुखबिरी करने वालों को बेरहमी से कत्ल की चेतावनी जारी की।
नायकू के ढेर होने से कश्मीर में हिजबुल की कमर टूट गई है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आतंकियों की रैकिंग में नायकू को ए प्लस प्लस श्रेणी (सबसे ऊपर) में रखा गया था। मोस्ट वांटेड की सूची में सबसे पहला नाम नायकू का था जिस पर 12 लाख रुपये का इनाम भी रखा गया था।
नायकू के मारे जाने से अब हिजबुल के साथ दूसरे आतंकी संगठनों का हौसला भी पस्त होना लाजमी है। बताया जा रहा है कि नई भर्ती से लेकर आतंकी ठिकाने बनाने और हमले को अंजाम देने की साजिश रचने में नायकू को माहिर माना जाता था।
- कश्मीर के स्थानीय युवाओं के हिजबुल से जुड़ने पर लगेगा विराम
- आतंकी साजिशों की प्लानिंग रुकेगी
- हिजबुल के आतंकियों को कमान देने वाला कोई नहीं रहा
- बचे आतंकियों का मनोबल टूटेगा
100 से अधिक युवाओं को जोड़ चुका था
हिजबुल मुजाहिदीन के लिए कश्मीर के स्थानीय युवाओं की भर्ती करने का जिम्मा रियाज नायकू पर ही था। नायकू कश्मीर के 100 से अधिक स्थानीय युवाओं को अपने साथ जोड़ चुका था। वह अभी भी कश्मीरी युवाओं को बरगलाकर अपने साथ जोड़ रहा था।