वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी पहली बार आतंकियों के निशाने पर नहीं थे। इससे पहले भी वह कई बार आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। आइए जानते हैं कितनी बार आतंकियों ने उन्हें निशाना बनाया।
वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी को आतंकियों ने 1996 में और 2006 में भी अगवा कर लिया था। 1996 में 19 पत्रकारों के साथ अगवा बुखारी को सात घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया था। 2006 में बंधक बनाकर उन्हें मारने की कोशिश की गई थी, लेकिन बंदूक जाम होने की वजह से उनकी जान बच गई थी।
जबकि वर्ष 2000 में उन पर हमला हुआ था। इसके बाद उन्हें सुरक्षा भी दी गई थी। शुजात बुखारी के बड़े भाई सईद बशारत बुखारी पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में कानून मंत्री हैं। शुजात बुखारी के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं।
वह ‘राइजिंग कश्मीर’ के अलावा कश्मीरी भाषा के अखबार संगरमाल और उर्दू दैनिक ‘बुलंद कश्मीर’ के संपादक और प्रकाशक भी थे। इसके अलावा वह जम्मू-कशमीर में द हिंदू के कई वर्षों तक ब्यूरो चीफ रहे।
शुजात बुखारी के हमलावरों के फोटो जारी
शुजात बुखारी पर हमले के मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से हासिल संदिग्धों के फोटो जारी किए हैं। इसमें एक मोटरसाइकिल पर तीन युवक दिख रहे हैं। गाड़ी चला रहा युवक हेलमेट पहने है जबकि पीछे बैठने वाले युवक ने मास्क लगा रखा है। बीच में बैठे युवक का चेहरा नहीं दिख रहा है।
पुलिस ने कोठीबाग पुलिस स्टेशन, पीसीआर श्रीनगर या फिर पुलिस कंट्रोल रूम में इन संदिग्धों के बारे में सूचना देने को कहा है। साथ ही कहा है कि सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।
वह भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सामान्य बनाने के लिए जारी ट्रैक -2 की प्रक्रिया में भी शामिल थे। इसके अलावा कश्मीर घाटी में शांति के लिए लगातार सम्मेलनों का आयोजन करते रहे। कश्मीर के सबसे पुराने और सबसे बड़े साहित्यिक संगठन एबी मरकज कामरज के अध्यक्ष भी थे।
आपको बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार व अंग्रेजी अखबार राइजिंग कश्मीर के मुख्य संपादक शुजात बुखारी तथा उनके पीएसओ की आतंकियों ने गुरुवार शाम हत्या कर दी। प्रेस इन्क्लेव के पास उनकी गाड़ी को घेरकर आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग की।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले की निंदा करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया है। पुलिस ने हमले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के इलाकों की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया गया है।
शाम सात बजे प्रेस इन्क्लेव से जैसे ही वह अपनी गाड़ी से जाने लगे तो आतंकियों ने गाड़ी को घेरकर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इसके बाद वे मौके से फरार हो गए। बताते हैं कि चार आतंकियों ने बिल्कुल करीब से गोलियां बरसाईं। सूत्रों ने यह भी बताया कि आतंकी अपने साथ पीएसओ की हथियार भी ले गए हैं।
घटना के बाद शुजात तथा उनके पीएसओ को एसएमएचएस अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने मृत लाया घोषित कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया कि यह कायराना हरकत है। यह कश्मीर की स्वस्थ आवाज को दबाने का बी प्रयास है। वह निर्भिक पत्रकार थे। उनके निधन से गहरा दुख है।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घटना पर शोक जताते हुए ट्वीट किया कि वह इस प्रकार की हिंसा की निंदा करती हैं और परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताते हैं। ईद की पूर्व संध्या पर आतंक का कुरुप चेहरा सामने आया है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ट्वीट कर कहा कि वह इस घटना से हतप्रभ हैं। दुख की इस घड़ी में परिवार वालों को शक्ति प्रदान करें। लश्कर के प्रवक्ता डा. अब्दुल्ला गजनवी ने इस घटना को अफसोसजनक खबर बताते हुए कहा है कि शुजात की हत्या आजादी की आवाज को दबाने की साजिश है।