पतंगों में उपयोग होने वाले धारदार धागों पर प्रतिबंध लगाने के लिए दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल डीसी रैना को निर्देश दिए कि इस पर प्रतिबंध लगाया जाए।
‘सेव’ नामक एनजीओ की ओर से दायर एक याचिका में कहा गया कि इस तरह का मांझा इंसानों के अलावा पक्षियों और जानवरों के लिए भी घातक है। इस पर सरकार को प्रतिबंध लगाना चाहिए।
मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने वन विभाग से आयुक्त सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, आईजीपी जम्मू, डीसी जम्मू, एसएसपी जम्मू को इस संबंध में नोटिस जारी किया, जिसे डिप्टी एडवोकेट जनरल पीएस चंदेल ने स्वीकार किया।
अदालत ने याचिका में शामिल मुद्दों पर गौर करने के बाद एजी रैना और डीएजी चंदेल को इस मामले में किए गए राहत के दावे पर सरकार से निर्देश लेने को कहा। साथ ही मामले को एक मार्च 2016 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान एडवोकेट शेख शकील ने कहा कि यह मांझा इंसानों के लिए भी घातक है। इसकी खरीद-बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इससे पहले अगस्त 2015 में डीसी जम्मू ने धारा 144 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए 60 दिनों का प्रतिबंध लगाया था।
इस दौरान प्रशासन ने कई स्थानों पर छापामारी भी की थी। कई स्थानों से भारी मात्रा में चाईनीज मांझा बरामद किया गया था। लेकिन उसके बाद फिर वही स्थिति हो गई। इस दौरान एजी रैना ने स्वीकार किया कि मांजा धागा खतरनाक है और इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करवाने के लिए थोड़ा समय देने की मोहलत मांगी।