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जम्मू-कश्मीर: रिश्तेदारों के घर पहुंच रहे जीरो लाइन वाले

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भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर गोलाबारी ने स्थानीय ग्रामीणों को सहमा दिया है। रविवार शाम से शुरू हुई गोलाबारी देर रात तक जारी रहने से जीरो लाइन के आवासीय इलाकों में बदहवासी छा गई। लंबी रेंज के मोर्टार फिर आवासीय इलाकों के आसपास गिरने लगे, जिससे कई घरों से निकलकर ग्रामीण इधर-उधर शरण लेने को मजबूर हो गए।
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सोमवार की सुबह छन्नलाल दीन सहित सीमा से बिल्कुल सटे मादा, पहाड़पुर और महराजपुर के ग्रामीणों ने ताजा हालात के लिए पाकिस्तान के साथ रियासत और केंद्र सरकार पर भी रोष जताया। छन्नलाल दीन के रहने वाले ग्रामीण सुरजीत सिंह ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच के तनाव का खामियाजा सरहदी इलाके के ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है।

आए दिन सीमा पर गोलीबारी से लेकर मोर्टार दागे जाते हैं। रविवार शाम छह बजे से की जा रही गोलाबारी में आवासीय इलाकों को निशाना बनाया गया है।
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दूर की कौड़ी बना सुनहरा ख्वाब

लोगों के घरों के आसपास गोले गिरे जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी करतूत से बाज नहीं आ रहा तो भारत सरकार ने भी ग्रामीणों की सुध लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर प्लॉट देने का ख्वाब दिखाया गया तो दूर की कौड़ी बना हुआ है।

इसी तरह से अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गोलाबारी से हुए धमाकों ने पूरे गांव को दहला दिया। आधे से ज्यादा घरों के लोग मजबूरन अपने रिश्तेदारों के घर शरण लेने चले गए। गांव में जो लोग रहे भी तो वह दहशत के बीच रात बिताने को मजबूर हुए। ग्रामीणों ने कहा कि जीरो लाइन पर बसे गांव सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

भारत और पाकिस्तान की चौकियों पर होने वाली फायरिंग के दौरान भी जीरो लाइन तक प्रभाव पड़ता है। जब मोर्टार चलाए जाते हैं तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं। ऐसे हालात में ग्रामीणों के पास छिपने के लिए कोई जगह भी नहीं बचती।
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