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घाटी में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा पर केंद और प्रदेश से रिपोर्ट तलब

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जम्मू। कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यक समुदाय के पंचायती नुमाइंदों की हत्या मामले का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यक (कश्मीरी पंडित, हिंदू, सिख) पंचायती नुमाइंदों को सुरक्षा देने के मामले में एक माह में रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने कहा है कि यदि चार हफ्तों में एक्शन टेकन रिपोर्ट नहीं दी जाती है तो मानवाधिकार सुरक्षा अधिनियम 1993 की धारा 13 के तहत संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी के आदेश दिए जाएंगे।
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अश्वनी कुमार चुरंगू ने कुलगाम कश्मीर के सरपंच विजय रैना के साथ आयोग से शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। कई पंचायती नुमाइंदों की हत्या की जा चुकी है। हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तोयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन लगातार हत्याओं के लिए धमका रहे हैं, लेकिन केंद्र और यूटी प्रशासन ने अभी तक कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया है। लिहाजा सरकार को तत्काल इन नुमाइंदों को पर्याप्त सुरक्षा अथवा उनमें डर दूर करने के लिए पुख्ता कदम उठाए जाने चाहिए। आयोग ने केंद्रीय गृह सचिव और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव से मामले पर चार हफ्ते में एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की है।
स्पेशल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की मांग
शिकायत में अश्वनी कुमार चुरंगू ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार मामले में स्पेशल क्राइम्स ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग भी उठाई है। शिकायत में एनएचआरसी की ओर से जून 1999 में दिए गए एक फैसले का जिक्र किया गया है जिसमें आयोग ने कहा था कि कश्मीरी पंडितों के साथ की गई ज्यादतियां नरसंहार जैसी हैं। च्रुंगू ने कहा है कि कश्मीरी घाटी में गैर मुस्लिम समुदायों के साथ आतंकियों और कट्टरपंथियों की ओर से की गईं ज्यादतियों की विस्तृत जांच होनी चाहिए।
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